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Monkeypox Myths: संक्रमण को लेकर ऐसी गलत जानकारियां आपको कर सकती हैं भ्रमित, जानिए क्या है सच्चाई?

Mon, 01 Aug 2022 03:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 01 Aug 2022 03:52 PM IST
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मंकीपॉक्स के बारे में जानिए - फोटो : ANI

भारत सहित दुनिया के कई देशों में इस समय कोरोना के साथ मंकीपॉक्स संक्रमण का प्रकोप जारी है। दुनियाभर में अब तक इसके 20 हजार से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां अब तक चार लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, इसमें से शनिवार को एक युवक की मौत भी हो गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस संक्रमण के जोखिम को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंकीपॉक्स के प्रकोप को 'वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है।



गौरतलब है कि कई देशों के लिए मंकीपॉक्स संक्रमण नया है, ऐसे में इससे संबंधित सही जानकारियों का अभाव देखा जा रहा है, ऐसी स्थिति में कई तरह की गलत और भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किसी भी बीमारी से तभी बचाव किया जा सकता है, जब उसके बारे में लोगों को सही जानकारी हो। मंकीपॉक्स को लेकर जिस तरह से सोशल मीडिया पर अफवाह और गलत जानकारियां तेजी से फैल रही हैं, इसको लेकर लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है। गलत जानकारियों की स्थिति में बीमारी को नियंत्रित कर पाना कठिन हो सकता है। आइए जानते हैं कि मंकीपॉक्स संक्रमण की क्या सच्चाई है और किस तरह की अफवाहों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए?

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मंकीपाॅक्स संक्रमण की गंभीरता - फोटो : istock

मिथ- जानलेवा है मंकीपॉक्स का संक्रमण

मंकीपॉक्स संक्रमण की शुरुआत से ही इस तरह की बातें सुनने में आ रही हैं कि इसका संक्रमण काफी घातक हो सकता है। मंकीपॉक्स से संक्रमित हो जाने के बाद जिंदा रहने की संभावना काफी कम हो जाती है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे खारिज करते हैं।
यूएस सीडीसी के अनुसार, मंकीपॉक्स से संक्रमित होने वाले 99 फीसदी लोगों में ठीक होने और लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना होती है। मंकीपॉक्स शायद ही कभी गंभीर स्थितियों का कारण बनता है। हालांकि इस वायरल संक्रमण के लक्षण गंभीर जरूर हो सकते हैं।

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मंकीपॉक्स से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : istock

मिथ- लाइलाज है मंकीपॉक्स संक्रमण

मंकीपॉक्स के इलाज और बचाव को लेकर भी लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि इस संक्रमण से बचाव के लिए कोई पुख्ता टीका या उपाय नहीं है। हालांकि यूएस सीडीसी का कहना है कि मंकीपॉक्स और चेचक के वायरस आनुवंशिक रूप से समान हैं। चेचक के वायरस से बचाव के लिए प्रयोग में लाए जा रहे टीकों का उपयोग मंकीपॉक्स के संक्रमण को रोकने के लिए किया जा सकता है। चेचक का टीकाकरण मंकीपॉक्स के संक्रमण से भी सुरक्षा दे सकता है।

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मंकीपॉक्स के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : istock

मिथ- चेचक और मंकीपॉक्स एक जैसा ही संक्रमण है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि चेचक और मंकीपॉक्स समान दिखने वाले संक्रमण हैं, लेकिन मंकीपॉक्स का संक्रमण रोग की स्थिति के मामले में बहुत अलग है। मंकीपॉक्स के संक्रमण में लक्षण दर्दनाक होते हैं, इस संक्रमण की एक और खास विशेषता यह है कि यह लिम्फ नोड्स में सूजन का कारण बनता है। इसलिए इसे चेचक की तरह का ही संक्रमण मान लेना सही नहीं है। दोनों के इलाज के लिए अलग-अलग तरीकों को भी प्रयोग में लाया जाता है।

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मंकीपॉक्स संक्रमण से कैसे रहें सुरक्षित? - फोटो : istock

मिथ- मंकीपॉक्स का संक्रमण हवा के माध्यम से फैलता है।

मंकीपॉक्स संक्रमण के प्रसार को लेकर भी कई तरह की अफवाहें हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह वायरस सांस के माध्यम से कोरोना की ही तरह संक्रमण का कारण बनता है। हालांकि अध्ययनों में पाया गया है कि संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क, घाव या शारीरिक द्रव के संपर्क में आने या फिर संक्रमित के साथ शारीरिक संबंध रखने वाले लोगों में मंकीपॉक्स का संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है। हवा के माध्यम से इसके प्रसार को लेकर प्रमाण नहीं हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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