बढ़ती जनसंख्या इस समय वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। भारत के संदर्भ में स्थिति और भी डराने वाली है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक दशक में देश की आबादी काफी तेजी से बढ़ती देखी गई है। हालांकि इस संदर्भ में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस -5) द्वारा जारी हालिया आंकड़े थोड़ी राहत देने वाले हैं। एनएफएचएस -5 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रजनन दर 2.2 से घटकर 2.0 हो गई है। जनसंख्या नियंत्रण उपायों के मद्देनजर इन आंकड़ों को बेहतर माना जा रहा है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर), जिसे प्रति महिला से होने वाले बच्चों की औसत संख्या के रूप में मापा जाता है, उसमें गिरावट दर्ज की गई है।
NHFS-5 सर्वे: जनसंख्या रोकथाम के संबंध में मिले अच्छे संकेत, इस बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने जताई चिंता
करीब साढ़े छह लाख परिवारों के डेटा का अध्ययन
इस सर्वे के लिए एनएफएचएस द्वारा देश 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों से लगभग 6.37 लाख परिवारों से सैंपल लिए गए। जिसमें 7.24 लाख महिलाओं और 1.01 लाख पुरुषों को शामिल किया गया। डेटा अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि बढ़ती जनसंख्या की रोकथाम को लेकर लोग अब पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। भारत में केवल पांच राज्य ऐसे हैं, जो 2.1 के प्रजनन दर के ऊपर हैं। बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35) और झारखंड (2.26) मणिपुर (2.17) प्रजनन दर वाला राज्य है।
बच्चों का मृत्युदर घटा
इस सर्वे में एक और बात सामने आई है, जिसके अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में थोड़ी कमी आई है। यह आंकड़ा अब 38 से घटकर से 36 प्रतिशत रह गया है। स्टंटिंग के मामले पुडुचेरी में सबसे कम (20 प्रतिशत) और मेघालय में उच्चतम (47 प्रतिशत) है। इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दर्शाता है कि बच्चों के पोषण और देखभाल में पहले से अधिक सुधार हुआ है।
मोटापा बढ़ना बड़ी समस्या
इस सर्वेक्षण में विशेषज्ञों ने महिला और पुरुष दोनों में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर चिंता जताई है। मोटापा को कई प्रकार के गंभीर रोगों का कारक माना जाता है। एनएफएचएस-4 की तुलना में एनएफएचएस-5 में अधिकतर राज्यों में लोगों में वजन बढ़ने की समस्या देखी गई है। केरल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, गोवा, सिक्किम, मणिपुर, दिल्ली, तमिलनाडु, पुडुचेरी, पंजाब, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप (34-46 प्रतिशत) में एक तिहाई से अधिक महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता मोटापा कई प्रकार के रोगों का कारण बन सकता है, जिसको लेकर लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
शोध की मानें तो मोटापा ग्रस्त लोगों में अन्य लोगों की तुलना में डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। वैश्विक स्तर पर हृदय रोग, मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं। इस खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी लोगों को मोटापा की रोकथाम को लेकर व्यापक उपाय करने की आवश्यकता है, वरना आने वाले समय में इसके कारण कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
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नोट: यह लेख नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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