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NHFS-5 सर्वे: जनसंख्या रोकथाम के संबंध में मिले अच्छे संकेत, इस बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Fri, 06 May 2022 06:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 06 May 2022 06:28 PM IST
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India's Total Fertility Rate has come down from 2.2 to 2.0, says National Family Health Survey
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट - फोटो : iStock

बढ़ती जनसंख्या इस समय वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। भारत के संदर्भ में स्थिति और भी डराने वाली है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक दशक में देश की आबादी काफी तेजी से बढ़ती देखी गई है। हालांकि इस संदर्भ में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे  (एनएफएचएस -5) द्वारा जारी हालिया आंकड़े थोड़ी राहत देने वाले हैं। एनएफएचएस -5 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रजनन दर 2.2 से घटकर 2.0 हो गई है। जनसंख्या नियंत्रण उपायों के मद्देनजर इन आंकड़ों को बेहतर माना जा रहा है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर), जिसे प्रति महिला से होने वाले बच्चों की औसत संख्या के रूप में मापा जाता है, उसमें गिरावट दर्ज की गई है।



रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिला और पुरुष दोनों में मोटापा तेजी से बढ़ा है। महिलाओं में मोटापा 21 फीसदी से बढ़कर 24 फीसदी और पुरुषों में 19 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गया है। सेहत के लिहाज से बढ़ते इस दर को काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में अब लोगों में गर्भनिरोधक उपायों को लेकर जागरूकता बढ़ती हुई देखी जा रही है, जो जनसंख्या की वैश्विक चुनौती के संदर्भ में अच्छा संकेत है, हालांकि बढ़ता मोटापा एक नई समस्या बनकर उभर रहा है। आइए आगे इस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से समझते हैं।

India's Total Fertility Rate has come down from 2.2 to 2.0, says National Family Health Survey
जनसंख्या के लिहाज से अच्छे संकेत - फोटो : iStock

करीब साढ़े छह लाख परिवारों के डेटा का अध्ययन

इस सर्वे के लिए एनएफएचएस द्वारा देश 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों से लगभग 6.37 लाख परिवारों से सैंपल लिए गए। जिसमें 7.24 लाख महिलाओं और 1.01 लाख पुरुषों को शामिल किया गया। डेटा अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि बढ़ती जनसंख्या की रोकथाम को लेकर लोग अब पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। भारत में केवल पांच राज्य ऐसे हैं, जो 2.1 के प्रजनन दर के ऊपर हैं। बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35) और झारखंड (2.26) मणिपुर (2.17) प्रजनन दर वाला राज्य है।

India's Total Fertility Rate has come down from 2.2 to 2.0, says National Family Health Survey
बच्चों के पोषण में सुधार - फोटो : Pixabay

बच्चों का मृत्युदर घटा

इस सर्वे में एक और बात सामने आई है, जिसके अनुसार पिछले चार वर्षों में भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में थोड़ी कमी आई है। यह आंकड़ा अब  38 से घटकर से 36 प्रतिशत रह गया है। स्टंटिंग के मामले पुडुचेरी में सबसे कम (20 प्रतिशत) और मेघालय में उच्चतम (47 प्रतिशत) है। इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दर्शाता है कि बच्चों के पोषण और देखभाल में पहले से अधिक सुधार हुआ है। 

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India's Total Fertility Rate has come down from 2.2 to 2.0, says National Family Health Survey
ca - फोटो : iStock

मोटापा बढ़ना बड़ी समस्या

इस सर्वेक्षण में विशेषज्ञों ने महिला और पुरुष दोनों में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर चिंता जताई है। मोटापा को कई प्रकार के गंभीर रोगों का कारक माना जाता है। एनएफएचएस-4 की तुलना में एनएफएचएस-5 में अधिकतर राज्यों में लोगों में वजन बढ़ने की समस्या देखी गई है। केरल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, गोवा, सिक्किम, मणिपुर, दिल्ली, तमिलनाडु, पुडुचेरी, पंजाब, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप (34-46 प्रतिशत) में एक तिहाई से अधिक महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता मोटापा कई प्रकार के रोगों का कारण बन सकता है, जिसको लेकर लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

शोध की मानें तो मोटापा ग्रस्त लोगों में अन्य लोगों की तुलना में डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। वैश्विक स्तर पर हृदय रोग, मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं। इस खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सभी लोगों को मोटापा की रोकथाम को लेकर व्यापक उपाय करने की आवश्यकता है, वरना आने वाले समय में इसके कारण कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
 



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नोट: यह लेख नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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