साल 2019 से दुनियाभर में जारी कोरोना संक्रमण ने कई प्रकार से हमारी सेहत को क्षति पहुंचाई है। इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कोरोना महामारी ने हृदय, फेफड़ों से लेकर बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज जैसी समस्याओं को काफी बढ़ा दिया है। इस बीच एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों ने मुंबई सहित कई राज्यों में कुष्ठ रोग के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद से मुंबई में साल 2022-23 में 626 मामले दर्ज किए गए जो साल 2021-22 के आंकड़ों से 87 प्रतिशत अधिक हैं।
कोरोना के दुष्प्रभाव: महामारी के बाद इस रोग में दर्ज किया गया भारी उछाल, करीब 80% मरीज एडवांस स्टेज में
अधिकतर रोगी एडवांस स्टेज में
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बीमारी के बढ़ते मामलों से कहीं ज्यादा चिंताजनक इसका एडवांस स्टेज में पहुंचना माना जा रहा है। बीमारी के उन्नत चरण में रोगियों के अनुपात में वृद्धि देखी जा रही है। 2022-23 में मामलों में आश्चर्यजनक रूप से 77 प्रतिशत मामले उन्नत चरण मल्टीबैसिलरी (एमबी) में पाए गए।
क्या कोविड-19 सीधे तौर पर इस रोग के जोखिमों को बढ़ा रही है, इस बारे में फिलहाल अध्ययनों में कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों ने पाया कि महामारी ने अप्रत्यक्ष तौर पर, जिसमें बीमारी की स्क्रीनिंग की कमी को प्रमुख माना जा रहा है, इसने कुष्ठ रोग के मामलों को काफी बढ़ा दिया है।
कुष्ठ रोग के बारे में जानिए
कुष्ठ रोग, एक संक्रामक बीमारी है जो आपके शरीर के किसी भी हिस्से, हाथ, पैर और में घावों और तंत्रिका क्षति का कारण बनता है। कुष्ठ रोग बहुत संक्रामक नहीं होता है, इसके संक्रमण का जोखिम तभी होता है जब आप अनुपचारित कुष्ठ रोगी की नाक और मुंह की ड्रॉपलेट्स के निकट और सीधे संपर्क में आते हैं। वयस्कों की तुलना में बच्चों में कुष्ठ रोग होने की आशंका अधिक होती है।
रोगियों को स्क्रीनिंग और विशेष देखभाल जरूरी होती है। कोविड महामारी के दौरान स्क्रीनिंग में कमी के कारण इस रोग के मामले काफी बढ़े हुए रिपोर्ट किए गए।
क्या गंभीर हो सकते हैं इसके लक्षण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहत हैं, मल्टीबैसिलरी मामलों का बढ़ा हुआ मामला चिंता का कारण है। लोग अक्सर सफेद धब्बे जैसे शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। कई मामलों में बीमारी का पता ही तब चल पाता है जब ये तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा चुकी होती है, जिससे विकृति हो सकती है। कुष्ठ रोग, मुख्य रूप से आपके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की त्वचा और नसों को प्रभावित करती है।
तंत्रिकाओं में होने वाली क्षति के कारण हाथ और पैर में संवेदना की कमी होने और मांसपेशियों में कमजोरी का खतरा अधिक हो सकता है।
समय पर निदान और उपचार से हो सकता है इसका इलाज
डॉक्टर कहते हैं, अगर समय पर कुष्ठ रोग की पहचान और इलाज हो जाए तो इसके लक्षणों को कम करने और बीमारी को ठीक करने में लाभ मिल सकता है। कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है, पिछले 2 दशकों में कुष्ठ रोग से पीड़ित 16 मिलियन लोग ठीक हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कुष्ठ रोग से पीड़ित सभी लोगों का निःशुल्क उपचार प्रदान करता है। अगर आपको या आसपास किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखें तो तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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