लाइफस्टाइल की गड़बड़ी के कारण आर्थराइटिस यानी कि गठिया की समस्या का जोखिम काफी बढ़ गया है। गठिया की स्थिति में घुटनों या जोड़ों में सूजन और दर्द की समस्या बनी रहती है, जिससे कारण सामान्य रूप से चलना तक दूभर हो जाता है। आर्थराइटिस की समस्या कई प्रकार की होती है, इसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस सबसे सामान्य है। इसी तरह रूमेटीइड आर्थराइटिस (आरए) और सोरियाटिक अर्थराइटिस की समस्याओं को ऑटोइम्यून रोग माना जाता है।
Alert: गठिया-जोड़ों में दर्द से हैं परेशान? इन चीजों से करें परहेज, इनसे इंफ्लामेशन बढ़ने का रहता है खतरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नमक की कम कर दें मात्रा
आर्थराइटिस की जटिलताओं से बचाव के लिए आहार में नमक की भी मात्रा कम रखने की सलाह दी जाती है। शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन चूहों को अधिक नमक वाली चीजें खाने को दी गईं उनमें गठिया की समस्याओं का जोखिम अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि हाई सोडियम वाले आहार का सेवन गठिया की सूजन और ऑटोइम्यून बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
18,555 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नमक का अधिक सेवन करने वाले लोगों में रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा अधिक होता है।
शराब से बढ़ सकती है आपकी जटिलता
यदि आप शराब का सेवन करते हैं तो यह आदत भी गठिया की समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है। अध्ययनों में पाया गया है कि शराब का सेवन करने वाले लोगों में गाउट अटैक की आवृत्ति और इसकी गंभीरता अधिक हो सकती है। इसे ऑस्टियोआर्थराइटिस के भी कारक के तौर पर जाना जाता है।
प्रोसेस्ड फूड आइटम्स से करें परहेज
प्रोसेस्ड फूड आइटम्स न सिर्फ डायबिटीज और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, साथ ही गठिया की समस्या में भी इसे काफी नुकसानदायक माना जाता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्थराइटिस वाले रोगियों को रेड का भी सेवन कम करने की सलाह देते हैं। ये खाद्य पदार्थ इंटरल्यूकिन -6 (आईएल-6), सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी), और होमोसिस्टीन (5 विश्वसनीय स्रोत, 6) जैसे मार्करों को बढ़ावा दे सकते हैं।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।