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हिस्टरेक्टमी सर्जरी: किस बीमारी के इलाज में होती है इसकी जरूरत, सर्जरी के बाद कैसे रखें अपना ख्याल?

Thu, 16 Dec 2021 08:16 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 16 Dec 2021 08:16 PM IST
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hysterectomy surgery causes and precautions after surgery
गर्भाशय निकलने की सर्जरी - फोटो : Pixabay

प्रकृति ने हमारे शरीर में हर अंग को व्यवस्थित रखा है। कई बार किसी बीमारी या अन्य वजह से शरीर के किसी हिस्से को हटाना पड़ता है। यूट्रस रिमूवल या एब्डोमिनल हिस्टरेक्टमी भी ऐसी ही एक प्रक्रिया है, पिछले कुछ सालों में यह एक आम प्रकिया हो चली है। आपने अपने आस पास कई महिलाओं को इससे गुजरते हुए देखा-सुना होगा। इसके अंतर्गत पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाकर यूट्रस या उस हिस्से को शरीर से बाहर कर दिया जाता है जहां बच्चा 9 महीने पलता है। ये प्रक्रिया दो तरीकों से की जा सकती है। पार्शियल हिस्टरेक्टमी जिसमें केवल यूट्रस को निकाला जाता है और टोटल हिस्टरेक्टमी जिसमें यूट्रस के साथ सर्विक्स को भी निकाल दिया जाता है। कई बार किसी संक्रमण के आस-पास के हिस्सों में फैल जाने पर ओवरी और फेलोपियन ट्यूब्स को भी निकाला जा सकता है।



इस प्रक्रिया को वजाइना यानी योनि में चीरा लगाकर भी किया जाता है जिसे वजाइनल हिस्टरेक्टमी कहते हैं, या फिर पेट पर बहुत छोटे चीरे के साथ लेप्रोस्कोपी या रोबोटिक सर्जरी के द्वारा भी किया जा सकता है। सर्जरी की प्रक्रिया मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है। 

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यूट्रस निकालने की सर्जरी - फोटो : Pixabay

इन कारणों से हो सकती है जरूरत:
हिस्टरेक्टमी की जरूरत आमतौर पर कुछ वजहों से पड़ती है। इनमें गायनोकोलॉजिक कैंसर जैसे कि यूटरस या सर्विक्स कैंसर, फाइब्रॉइड्स, एंडोमेट्रियोसिस, यूटेराइन प्रोलैप्स, असामान्य वजाइनल ब्लीडिंग (रक्तस्राव), गम्भीर पेल्विक (कमर के निचले हिस्से का) दर्द आदि जैसी स्थितियां शामिल हैं। 

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डॉक्टर से लीजिए सलाह - फोटो : Pixabay

डॉक्टर से सलाह लेना बहुत आवश्यक
हिस्टरेक्टमी की प्रक्रिया या यूट्रस को निकालने की स्थिति ज्यादातर किसी बीमारी या ऐसी स्थिति की वजह से आती है जब यूट्रस की वजह से उसके आस पास के अंगों को भी नुकसान पहुंचने लगे। लेकिन यह याद रखिए कि हर परिस्थिति में यूट्रस निकाल देना जरूरी नही होता, कैंसर जैसी स्थितियों को छोड़कर। उदाहरण के लिए फाइब्रॉइड,यूटेराइन प्रोलैप्स और एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों में अन्य इनवेसिव इलाज भी अपनाए जा सकते हैं, इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लीजिए कि क्या और कोई विकल्प हो सकता है। ध्यान रखिए इस सर्जरी के बाद आपकी मां बनने की क्षमता पर विराम लग जाता है। 

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सर्जरी के बाद देखभाल जरूरी - फोटो : Pixabay

सर्जरी के बाद रखें ख्याल:

आमतौर पर यह सर्जरी सुरक्षित होती है और आजकल सर्जरी की कई उन्नत तकनीकें मौजूद हैं। इसलिए अगर सर्जरी ही एकमात्र विकल्प हो तो इसके बाद शरीर को विशेष ख्याल रखना भी आवश्यक होता है। सर्जरी के बाद इन बातों को जरूर ध्यान में रखें।

  • सर्जरी के बाद की स्थितियों को लेकर डॉक्टर से स्पष्ट सलाह लें। इसमें संक्रमण को लेकर क्या सावधानियां रखनी चाहिए, क्या सर्जरी के बाद ब्लीडिंग को लेकर कोई खास ध्यान रखना चाहिए, आदि जैसी बातें शामिल हैं। 
  • डॉक्टर को अपनी सारी वर्तमान दवाइयों और शारीरिक स्थिति के बारे में स्पष्ट बताएं। यदि आपको किसी चीज से एलर्जी है तो भी बताएं।
  • हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद आपकी डाइट, नहाना, खाना, उठना, चलना आदि सब रूटीन कैसा होगा इसको लेकर पूरी जानकारी लें।
  • यदि आपको पहले कभी कैथेटर से कोई परेशानी हुई हो तो डॉक्टर को बताएं क्योंकि इस सर्जरी के बाद भी कैथेटर लगाने की जरूरत होगी। 
  • सर्जरी के बाद अपने चीरे और दर्द को लेकर सतर्क रहें। यदि दर्द तेज रहता है, ब्लीडिंग ज्यादा होती है या किसी दवाई की एलर्जी होती है तुरन्त डॉक्टर को बताएं। 
  • सर्जरी के बाद शारीरिक सम्बन्धों को लेकर भी सतर्क रहें और डॉक्टर की सलाह पर ही चलें। 
  • सर्जरी के बाद हल्की- फुल्की एक्सरसाइज को लेकर भी सलाह लें। इस सर्जरी के बाद आप पूरी तरह सामान्य ज़िन्दगी की ओर लौट सकती हैं। इसलिए जीवन की नई शुरुआत करें।



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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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