स्वस्थ जीवन के लिए सभी लोगों को रोजाना रात में 7-9 घंटे की नींद पूरी करने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बहुत अधिक या कम सोना दोनों नुकसानदायक है। जो लोग रोजाना औसत घंटों से अधिक सोते हैं, उन्हें अक्सर अपने स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने के लिए कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बहुत अधिक या कम सोना, पूरी तरह से किसी की जीवनशैली या स्वास्थ्य की स्थिति का दोष नहीं हो सकता है। इसी से संबंधित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है।
अध्ययन: क्या आपको भी दिन में झपकी लेने की पड़ती है जरूरत, जानिए क्या हैं इसके कारण?
क्यों होती है दिन में झपकी की जरूरत?
एमजीएच वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में तीन स्लीपिंग मैकनिज्म के बारे में बताया है। अध्ययनकर्ताओं में से एक डॉ हसन दशती कहते हैं, सोने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। दिन की झपकी लेने के कारणों के बारे में जानने के लिए हमने प्रतिभागियों के जैविक कारणों के बारे में जानने की कोशिश की। अध्ययन के सटीक परिणाम पर पहुंचने के लिए प्रतिभागियों को स्लीप डेटा रिकॉर्ड करने के लिए मॉनिटर या एक्सेलेरोमीटर दिए गए थे। इसके आधार पर तीन संभावित स्लीपिंग मैकनिज्म के बारे में जानने को मिलता है।
क्यों पड़ती है दिन में नींद की जरूरत
पहले मैकनिज्म में वैज्ञानिकों ने इन लोगों पर गौर किया जो रात में नींद की कमी या जल्दी जागने के कारण दिन में झपकी लेते थे, जबकि दूसरे में उन लोगों पर गौर किया गया जिन्हें बिना किसी कारण के अधिक नींद की आवश्यकता थी। इन दोनों समूह के लोगों के बारे में अध्ययन के आधार पर डॉ हसन दशती कहते हैं, दिन में झपकी लेना पर्यावरण या व्यवहार संबंधी विकल्पों के साथ जैविक कारणों पर भी निर्भर करता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता
अध्ययन के सह लेखक और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्नातक छात्र इयास डाघलास कहते हैं, नींद संबंधी इस तरह की समस्याओं को नार्कोलेप्सी जैसे दुर्लभ नींद विकारों में शामिल किया जाना चाहिए। शोधकर्ता अभी भी छोटी झपकी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच के संबंधों को जानने के लिए अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन के परिणाम अब तक सामने नहीं आ सके हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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