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अध्ययन: क्या आपको भी दिन में झपकी लेने की पड़ती है जरूरत, जानिए क्या हैं इसके कारण?

Thu, 16 Dec 2021 05:13 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 16 Dec 2021 05:13 PM IST
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biological pathways that contribute to why we nap, reveals study
अधिक नींद आने की समस्या - फोटो : iStock

स्वस्थ जीवन के लिए सभी लोगों को रोजाना रात में 7-9 घंटे की नींद पूरी करने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बहुत अधिक या कम सोना दोनों नुकसानदायक है। जो लोग रोजाना औसत घंटों से अधिक सोते हैं, उन्हें अक्सर अपने स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने के लिए कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बहुत अधिक या कम सोना, पूरी तरह से किसी की जीवनशैली या स्वास्थ्य की स्थिति का दोष नहीं हो सकता है। इसी से संबंधित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है।



मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (एमजीएच) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में अधिक सोने की जरूरत होती है। इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 4,52,633 लोगों की आनुवंशिक जानकारियों का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे दिन में कितनी बार सोते हैं? इस आधार पर वैज्ञानिकों को ज्यादा सोने के संभावित जैविक कारणों के बारे में पता लगाने की कोशिश की है, आइए आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।

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नींद की समस्या के कारण - फोटो : Pixabay

क्यों होती है दिन में झपकी की जरूरत?
एमजीएच वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में तीन स्लीपिंग मैकनिज्म के बारे में बताया है। अध्ययनकर्ताओं में से एक डॉ हसन दशती कहते हैं, सोने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। दिन की झपकी लेने के कारणों के बारे में जानने के लिए हमने प्रतिभागियों के जैविक कारणों के बारे में जानने की कोशिश की। अध्ययन के सटीक परिणाम पर पहुंचने के लिए प्रतिभागियों को स्लीप डेटा रिकॉर्ड करने के लिए मॉनिटर या एक्सेलेरोमीटर दिए गए थे। इसके आधार पर तीन संभावित स्लीपिंग मैकनिज्म के बारे में जानने को मिलता है। 

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दिन की झपकी के क्या कारण हैं - फोटो : Pixabay

क्यों पड़ती है दिन में नींद की जरूरत
पहले मैकनिज्म में वैज्ञानिकों ने इन लोगों पर गौर किया जो रात में नींद की कमी या जल्दी जागने के कारण दिन में झपकी लेते थे, जबकि दूसरे में उन लोगों पर गौर किया गया जिन्हें बिना किसी कारण के अधिक नींद की आवश्यकता थी। इन दोनों समूह के लोगों के बारे में अध्ययन के आधार पर डॉ हसन दशती कहते हैं, दिन में झपकी लेना पर्यावरण या व्यवहार संबंधी विकल्पों के साथ जैविक कारणों पर भी निर्भर करता है।

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अधिक सोने के कारण क्या हैं - फोटो : getty images

क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता
अध्ययन के सह लेखक और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्नातक छात्र इयास डाघलास कहते हैं, नींद संबंधी इस तरह की समस्याओं को नार्कोलेप्सी जैसे दुर्लभ नींद विकारों में शामिल किया जाना चाहिए। शोधकर्ता अभी भी छोटी झपकी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच के संबंधों को जानने के लिए अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन के परिणाम अब तक सामने नहीं आ सके हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


 

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