आंखें, शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक हैं। प्रकृति ने अपने अद्भुत रंगों और कारीगरी को देखने के लिए मनुष्य को इस खूबसूरत उपहार से नवाजा है, लेकिन इस खूबसूरत प्राकृतिक उपहार का ठीक से ख्याल रखना अक्सर हम भूल जाते हैं। हम इन्हें सजाते-संवारते तो हैं लेकिन इन्हें स्वस्थ रखने के लिए उतने जतन करने पर ध्यान नहीं दे पाते। हम न केवल आंखों का अत्यधिक प्रयोग कर लेते हैं बल्कि कई बार उन पर जाने-अनजाने अत्याचार भी करते हैं, मौसम के बदलने पर आंखों की सेहत को लेकर गम्भीर न रहना ऐसी ही एक समस्या है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है बहुत अधिक ठंड का मौसम, जानिए कैसे रखें ख्याल?
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मौसम का आंखों पर प्रभाव
ठीक से ध्यान न रखने पर मौसम का असर आंखों पर तो पड़ता ही है, वहीं अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो आपको और भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है। बारिश में रेनकोट या चश्मा, इसी तरह गर्मी के मौसम में गॉगल्स पहनकर हम आंखों को सुरक्षित रख लेते हैं, लेकिन सर्दियों में हम यह सोचकर कोई उपाय करना भूल जाते हैं कि ठंड से आंखों का क्या बुरा होगा भला। लेकिन असल में इस मौसम में भी आंखों की देखभाल करना जरूरी है, चाहे हम घर में रहें या बाहर।
कोरोना के इस दौर में हमें और भी अलर्ट हो जाना चाहिए। हममें से अधिकांश लोगों ने कम्प्यूटर, टीवी, लैपटॉप या मोबाइल पर कोरोना के समय में बहुत वक्त गुजारा है। इसके अलावा विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना से बचाव के लिए भी आंखों की सुरक्षा जरूरी है।
कैसे रखें आंखों का ख्याल?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अपने रूटीन में कुछ सामान्य उपायों को शामिल करने के साथ चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस आदि से जुड़ी सावधानियां बरतकर आंखों को स्वस्थ रखा जा सकता है।
- आंखों को सूखने से बचाएं: सर्दियों का मौसम, त्वचा के साथ-साथ आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। आंखों में मौजूद प्राकृतिक नमी का बने रहना आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है। रूखी हवा के अलावा इस मौसम में हीटर जैसी चीजों का उपयोग भी आंखों में मौजूद नमी को सोख लेती है। इससे आंखों में रूखापन और किरकिराहट बढ़ जाती है। जरूरी है कि गर्मी पैदा करने वाले ऐसे साधनों का प्रयोग कम किया जाए और प्रयोग करते समय इनसे दूरी बनाई जाए।
- आंखों पर बार-बार हाथ न लगाएं: कोरोना से बचाव ही नहीं, सामान्य स्थितियों में भी आंखों पर बार बार हाथ लगाना नुकसानदायक हो सकता है। हमारे हाथों में मौजूद जर्म्स, वायरस और गंदगी बहुत आसानी से मुंह और आंखों के रास्ते शरीर में जा सकते हैं, इसलिए बार-बार आंखों पर हाथ लगाना समस्याओं का कारण बन सकता है। सर्दियों में वायरल केराटाइटिस जैसी समस्या भी हो सकती है, इससे कॉर्निया में सूजन आ सकती है। इसलिए आंखों को अगर छूना हो भी तो हाथ धोकर ही छुएं।
कैसे रखें आंखों का ख्याल
ठंड के मौसम का सबसे पहला असर त्वचा पर होता है, इसमें आंखों के आस पास की त्वचा भी शामिल है। इससे स्किन पर खुजली, दाने, रैशेज आदि हो सकते हैं। सुबह उठने पर पलकों पर सूजन, खुजली या पपड़ी जैसी भी स्थिति भी बन सकती है। इसलिए रोजाना अच्छे मॉइश्चराइर का उपयोग करें। दिन में भी नहाने के बाद स्किन को अच्छे से मॉइश्चराइज करें। घर से बाहर निकलते समय धूप के चश्मे, कैप या हैट आदि का उपयोग जरूर करें। इससे तेज धूप से आंखों का बचाव होगा।
कोरोना के आने के बाद जिस एक और चीज का खतरा बढ़ा है वह है कोरोना पीड़ितों में आंखों की रोशनी पर पड़ा बुरा प्रभाव। कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों ने धुंधलापन, नजर कमजोर होने जैसी शिकायत की है। इसलिए कोरोना से ठीक हो चुके लोग डॉक्टर से आंखों की सेहत को लेकर भी परामर्श जरूर लें। इसके अलावा सर्दियों में भी सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के सम्पर्क में अधिक देर रहना समय से पहले मोतियाबिंद की आशंका को बढ़ा सकता है।
इन बातों का भी रखें ख्याल
देश के कई शहरों में फिलहाल प्रदूषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है। वहीं ठंडे मौसम में धुंध या कोहरा भी आम होता है। जब कोहरे या नमी में प्रदूषण मिल जाता है तो यह आंखों के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकता है। इस तरह के कोहरे को स्मॉग भी कहा जाता है। यदि यह आंखों में चला जाए तो आंखों का लाल होना, जलन, पानी आना, रूखापन और किरकिराहट जैसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इस समय बाहर निकलते समय आंखों को कवर जरूर करें।
ठंड से बचिए: सामान्य सर्दी जुकाम का बुरा असर भी आंखों पर पड़ सकता है। ठंड के दिनों में सामान्य सर्दी-जुकाम की समस्या आम होती है। इसके कारण भी आंखों से पानी आने जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए ठंडी हवा में खुद को अच्छी तरह कवर करके रखें। खासतौर पर माथे और कानों को ढंककर रखें।
आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को टालें नहीं। जलन, खुजली, किरकिराहट, सूजन दर्द आदि यदि एक दिन से ज्यादा बना रहे और सामान्य उपायों से इसमें आराम न मिले तो तुरन्त आंखों के डॉक्टर से परामर्श लें। आंखों की एक्सरसाइज भी नियमित रूप से करें।
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