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हर साल डेंगू के प्रकोप के साथ ही अक्सर शुरू हो जाती हैं कई सारी हिदायतें। पैरों पर नारियल तेल लगाने से लेकर, घर में नारियल के छिलके और कपूर जलाने तक लोगों के पास कई नुस्खे होते हैं। भले ही उन्होंने वह नुस्खे आजमाए न हों, लेकिन किसी को बताते समय उनका कॉन्फिडेंस देखने लायक होता है। ऊपर से अगर किसी को डेंगू हो जाये तो ये हिदायतें अचानक हर कोने से सुनने को मिलने लगती हैं। खाने-पीने से चलने- फिरने तक की हिदायतें। बाकी सभी बातों के साथ ही कुछ चीजों के सेवन की सलाह भी बहुत आम है। इसमें पपीते के पत्तों का रस, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसे फल आदि शामिल हैं। तो क्या सच में ये तीनों चीजें डेंगू के मरीजों में चमत्कारी असर करती हैं? आइए जानते हैं।
विशेषज्ञ की सलाह: डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के ये हैं सबसे कारगर तरीके, बड़े काम की हैं ये चीजें
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डेंगू में प्लेटलेट्स काउंट का कम होना
कोरोना महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप देश में थोड़ा कम होना शुरू ही हुआ था कि अब डेंगू का हमला शुरू हो गया। कई राज्यों से अचानक डेंगू पीड़ितों के बढ़े हुए आंकड़े सामने आने लगे और वायरस के साथ-साथ मच्छरों से भी लड़ना लोगों का काम बन गया। यूं तो भारत में बारिश और सर्दी का मौसम आमतौर पर डेंगू पीड़ितों की संख्या में इजाफा करता ही है लेकिन इस बार यह समस्या और भी विकराल रूप लेकर सामने आई है। ऐसे कई लोग डेंगू के शिकार हुए जो पहले कोरोना की चपेट में आ चुके थे।
डेंगू के रोगियों में तेजी से घटती प्लेटलेट्स की मात्रा सबसे बड़ी समस्या होती है। माना जाता है कि प्लेटलेट्स को तुरन्त बढ़ाने में ऊपर लिखी तीनों चीजें कारगर साबित हो सकती हैं। यह बात कितनी शोध परक है, इससे अलग आइए यह जानते हैं कि आखिर वह क्या चीज हैं जो पपीते के पत्तों, कीवी और ड्रैगन फ्रूट को डेंगू के इलाज में सहायक बना सकती हैं?
पपीते के पत्तों का रस
पिछले कुछ सालों में पपीते के पत्तों के रस पर अलग-अलग जगह स्थानीय स्तर पर शोध हुए हैं, जिनमें यह देखा गया कि यह रस प्लेटलेट्स को बढ़ाने में भूमिका निभाता है। असल में पपीते के पत्तों के रस में फ्लेवनॉयड्स, अल्कोलाइड्स, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स जैसे कम्पाउंड होते हैं। यह एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर होता है और हीमोलायसिस यानी लाल रक्त कोशिकाओं के ब्रेकडाउन की प्रक्रिया के खिलाफ सुरक्षात्मक भूमिका निभाते हैं। इससे कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से बचाव होता है। इसके साथ ही इन पत्तियों में एक अनूठा फाइटोकैमिकल एकटोजेनिन भी होता है जो प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद करता है।
कीवी व ड्रैगन फ्रूट
ये दोनों ही फल वैसे तो भारत के घरों में उतने प्रचलित नहीं हैं लेकिन इन एक्जॉटिक फ्रूट्स ने पिछले कुछ समय से डेंगू के मरीज़ों के लिए बहुत राहतभरी भूमिका निभाई है। यहां तक कि डॉक्टर भी इन फलों को खाने की सलाह उन मरीजों को दे रहे हैं जिनके प्लेटलेट्स काउंट एक लाख से नीचे पहुंच चुके हैं। फैक्ट यह है कि कीवी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो प्लेटलेट्स के कम होने की रफ्तार पर लगाम कसते हैं। साथ ही कीवी में पोटेशियम और विटामिन-सी काफी अच्छी मात्रा में पाई जाती है जो प्लेटलेट्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यही नहीं कीवी का सेवन शरीर में ब्लड ट्राइग्लिसराइड के स्तर को भी घटाता है जिसका फायदा दिल को सेहतमंद बनाने में होता है।
इसी तरह ड्रैगन फ्रूट में मौजूद विटामिन-सी इम्युनिटी को मजबूती देता है और डेंगू के हेमोरेजिक बुखार से बचाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स से लेकर लायकोपेन, फाइबर, फास्फोरस और आयरन जैसे तत्व होते हैं जो प्लेटलेट्स की संख्या सुधारने में मदद करते हैं।
ये तीनों ही चीजें प्राकृतिक हैं और यदि पपीते के पत्तों को छोड़ भी दिया जाए तो बाकी दोनों फ्रूट्स तो सेहत के लिए सामान्यतौर पर भी फायदेमंद ही हैं, लेकिन जरूरी है कि इनके सेवन के साथ भी कुछ बातों का ध्यान रखा जाए।
- पत्ते हों या फल, साफ धुले हुए हों और पूरी तरह हाइजीन का प्रयोग करते हुए ही प्रयोग में लाएं।
- डेंगू के लिए किसी प्रशिक्षित डॉक्टर से इलाज लेने के साथ इन चीजों का सेवन करें। यानी दवाओं के साथ इन चीजों का उपयोग करें, केवल इन्हीं चीजों से इलाज करने की कोशिश न करें।
- यदि आप किसी तरह की अन्य शारीरिक अवस्था, एलर्जी आदि से जूझ रहे हों तो पपीते के पत्तों के सेवन के बारे में डॉक्टर से पूछ लें।
- पत्तों के रस या फलों का सेवन कितनी मात्रा में करना है यह भी जानें।
- पत्तों के रस के अलावा इसके सत्व या सप्लीमेंट्स भी बाजार में उपलब्ध हैं। उनका भी प्रयोग कर सकते हैं।
नोट: यह लेख डॉ अजय यादव के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।