अबतक कई तरह के वायरस झेल चुकी दुनिया पिछले छह महीनों से कोरोना वायरस की चपेट में है। दुनियाभर के 200 से ज्यादा देश कोरोना संक्रमण से प्रभावित हैं। कामकाज, आवागमन और अर्थव्यवस्था से लेकर इस वायरस ने काफी कुछ चौपट कर दिया है। लोग आम जीवन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। लोगों को इंतजार है तो बस इस वायरस की काट का। वैक्सीन और दवा के लिए दुनियाभर में रिसर्च हो रहे हैं। वैज्ञानिक अन्य तरीकों से भी इस वायरस को खत्म करने की संभावना तलाश रहे हैं। इसी क्रम में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक टूल विकसित की है, जिसके जरिए इंफ्लूएंजा के वायरस को खत्म करने में सफलता मिली थी। दावा है कि कोरोना को भी इसी तरह खत्म किया जा सकता है।
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कोरोना वायरस को ऐसे खत्म किया जा सकता है, 90 फीसदी सफलता का दावा
Sun, 07 Jun 2020 08:07 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sun, 07 Jun 2020 08:07 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
जीन एडिटिंग टूल 'पैकमैन'
- दरअसल, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा जीन एडिटिंग टूल विकसित किया है जो मरीज की संक्रमित कोशिकाओं में मौजूद कोरोना वायरस को खत्म कर सकता है। इस टूल को पैकमैन नाम दिया गया है। कोरोना की काट के रूप में इसके 90 फीसदी सफल होने का दावा किया जा रहा है।
Coronavirus
- फोटो : Pexels
इंफ्लूएंजा के वायरस से लड़ने को बनाया गया था
- शोधकर्ताओं ने इस टूल को इंफ्लूएंजा के वायरस से लड़ने के लिए विकसित किया था। अचानक चीन के वुहान से दुनियाभर में फैली महामारी के बाद इसका प्रयोग कोरोना वायरस के लिए किया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब इस टूल का इस्तेमाल कोरोना से संक्रमित फेफड़ों की कोशिकाओं पर किया गया तो 90 फीसदी तक सफलता मिली।
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कोरोना वायरस
- फोटो : Pixabay
कैसे काम करता है यह टूल
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, पैकमैन एक जीन एडिटिंग टूल है, जो एंजाइम Cas13 और RNA से मिलकर बना है। पैकमैन का पूरा नाम 'प्रोफेलैक्टिक एंटीवायरल क्रिस्पर इन ह्यूमन सेल्स' है। पैकमैन में मौजूद RNA एंजाइम को 'कोरोना वायरस के जीनोम सिक्वेंस' को तोड़ने का आदेश देता है। इसके बाद कोरोना वायरस इंसान के शरीर में अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाता और खत्म हो जाता है
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ह्यूमन ट्रायल से पहले जानवरों पर ट्रायल किया जाता है (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
जानवरों पर होगा ट्रायल
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जीन एडिटिंग टूल का ट्रायल पहले कोरोना संक्रमित जानवरों पर किया जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है। इस रिसर्च और ट्रायल की पूरी प्रक्रिया में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और स्वीडन के कैरोलिन्स्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता भी शामिल होंगे।