विश्व स्वास्थ्य संगठन का पहले ये कहना रहा था कि कोरोना वायरस का संक्रमण किसी सतह के संपर्क में आने से ही होता है। वैज्ञानिक सबूत भी इसकी तस्दीक कर रहे थे। यही वजह थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने कोविड-19 की बीमारी से बचाव के लिए मुख्य तौर पर हाथ धोने की सलाह दी थी। लेकिन फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि खास परिस्थितियों में 'हवा से संक्रमण' की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब ये हुआ कि जब लोग एक दूसरे से बात कर रहे होते हैं या फिर सांस छोड़ रहे होते हैं, तो सूक्ष्म कणों के ज़रिये भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है।
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Coronavirus: हवा में कितनी देर जिंदा रहता है कोरोना वायरस, कैसे फैलता है संक्रमण और हमें क्या करना चाहिए?
Thu, 06 Aug 2020 06:22 PM IST
निलेश कुमार
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी
Published by: निलेश कुमार
Updated Thu, 06 Aug 2020 06:22 PM IST
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Coronavirus in Air
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
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हवा से संक्रमण का मतलब
- 'हवा से संक्रमण' तब होता है जब हम सांस के जरिए बैक्टीरिया या वायरस लेते हैं। ये बैक्टीरिया या वायरस हवा में तैर रहे सूक्ष्म कणों के जरिए हम तक पहुंचते हैं। ये सूक्ष्म कण घंटों तक हवा में रह सकते हैं। कफ की छोटी-छोटी बूंदें बड़े इलाके तक फैल सकती है। टीबी (तपेदिक), फ्लू और निमोनिया हवा के जरिए फैलने वाली बीमारियों के उदाहरण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये माना है कि इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि बंद और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कोरोना वायरस का संक्रमण हवा के जरिए हो सकता है।
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ये हवा में कितनी देर तक जिंदा रहता है?
- रिसर्च में ये बात सामने आई है कि कृत्रिम रूप से जब हवा में कोरोना वायरस का छिड़काव किया गया तो ये पाया गया कि कोरोना वायरस तीन घंटे तक जीवित रह सकता है। लेकिन वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि ये प्रयोग लैबोरेटरी के नियंत्रित माहौल में किया गया था, असल जिंदगी में नतीजे अलग हो सकते हैं।
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- कोरोना वायरस संक्रमण के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे ये आशंका मजबूत हुई हैं कि इस महामारी का संक्रमण हवा के जरिए भी हो सकता है। अमेरिका के वॉशिंगटन शहर के माउंट वर्नन में एक आदमी पर कम से कम 45 लोगों को संक्रमित करने का संदेह रहा। ये लोग एक गायक मंडली के सदस्य थे। संक्रमित होने वाले लोगों में से कुछ ने सोशल डिस्टेंसिंग के कोई नियम नहीं तोड़े थे।
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- जनवरी के आखिर में चीन के ग्वांग्झू में भी ऐसा ही एक मामला रिपोर्ट हुआ था, जिसमें एक आदमी पर कम से कम नौ लोगों को संक्रमित करने का संदेह था। सभी लोगों ने एक ही रेस्तरां में खाया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि रेस्तरां में एक संक्रमित ग्राहक उस व्यक्ति से छह मीटर की दूरी पर बैठा हुआ था।