फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इम्यूनिटी बढ़ाने में कितने कारगर हैं देसी नुस्खे, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Wed, 22 Apr 2020 11:13 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Wed, 22 Apr 2020 11:13 PM IST
विज्ञापन
How effective are Ayurveda Home remedies to boost immunity, what experts says
सांकेतिक तस्वीर

एक तरफ जहां सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की तमाम कोशिशें कर रही है तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर गलत और गुमराह करने वाली सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। यहां हम इससे जुड़े कुछ प्रमुख उदाहरणों की चर्चा करेंगे।

पारंपरिक जड़ी-बूटियां वायरस को लेकर आपकी रोग प्रतिरोधी क्षमता नहीं बढ़ातीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस के खिलाफ जो रणनीति है, उसमें वो देशवासियों को पारंपरिक जड़ी-बूटी इस्तेमाल करने की भी सलाह देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा है कि लोगों को काढ़ा बनाने के लिए दिशा-निर्देश का पालन करना चाहिए। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा।

How effective are Ayurveda Home remedies to boost immunity, what experts says
काढ़ा

काढ़ा कई तरह की पत्तियों और जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाया जाता है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि इस तरीके से वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। येल यूनिवर्सिटी की इम्यूनोलॉजिस्ट अकिको इवासाकी का कहना है, "समस्या यह है कि इस तरह के कई दावों (जिसमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा किया जाता है) का कोई प्रमाणिक आधार नहीं है।”

भारत का आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देता है और रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने को लेकर कई तरह के दावे करता है। इनमें से कई उपायों को मंत्रालय की तरफ से खासतौर पर कोरोना वायरस को रोकने के लिए प्रचारित किया गया है। जबकि इनके प्रभावी होने को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

भारत सरकार की अपनी फैक्ट-चेकिंग टीम ने इस तरह के दावों को खारिज कर दिया है। इनमें से गर्म पानी पीने और सिरका और नमक के घोल से गरारा करने जैसे उपाय शामिल हैं।

How effective are Ayurveda Home remedies to boost immunity, what experts says
मथुरा में घर से बाहर आए लोग सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते दिखे। (File Photo) - फोटो : PTI

लॉकडाउन के प्रभाव को लेकर गलत आंकड़े
एक लोकप्रिय हिंदी चैनल ने एक रिसर्च का दावा करते यह रिपोर्ट दिखाई कि अगर लॉकडाउन नहीं हुआ होता तो 15 अप्रैल तक भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित आठ लाख मरीज होते। चैनल ने ये आकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के हवाले से दिखाया।

सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने यह स्टोरी ट्वीट की और फिर इसे हजारों लोगों ने देखा और रिट्वीट किया। लेकिन भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ऐसा कोई अध्ययन कभी हुआ ही नहीं। आईसीएमआर ने भी इसकी पुष्टि नहीं की।

विज्ञापन
विज्ञापन
How effective are Ayurveda Home remedies to boost immunity, what experts says
Research

रिसर्च मैनेजमेंट और पॉलिसी के क्षेत्रीय प्रमुख रजनीकांत ने बीबीसी से कहा, "आईसीएमआर ने कभी ऐसी कोई स्टडी नहीं कि है जिसमें लॉकडाउन के इस असर का जिक्र किया गया है।" 

स्वास्थ्य मंत्रालय के इनकार के बाद भी चैनल अपनी स्टोरी की सच्चाई को लेकर कायम रहा। हालांकि मंत्रालय का यह जरूर कहना है कि कुछ ‘आंतरिक शोध’ हुए हैं जो संक्रमित होने वालों की संख्या को लेकर अनुमान व्यक्त करते हैं लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। भारत में चूंकि 25 मार्च से लोग सख्त पाबंदियों के अंदर रह रहे हैं इसलिए अगर लॉकडाउन नहीं होने की स्थिति में कितने लोग वाकई में संक्रमित होते, यह नहीं कहा जा सकता है।

विज्ञापन
How effective are Ayurveda Home remedies to boost immunity, what experts says
चाय - फोटो : पेक्सेल्स

कोरोना पर चाय के असर को लेकर गलतफहमी
"कौन जानता था कि एक कप चाय इस वायरस का इलाज होगी?" सोशल मीडिया पर चीन के डॉक्टर ली वेनलियांग के हवाले से यह झूठा दावा फैलाया जा रहा है। यह वही डॉक्टर हैं जिन्होंने पहली बार वुहान में इस वायरस के बारे में बताया था और बाद में जिनकी संक्रमण से मौत हो गई थी।

यह दावा किया जा रहा है कि डॉक्टर ली ने चाय में पाए जाने वाले मिथाइलक्सान्थाइन को लेकर यह प्रमाण पेश किया था कि इससे कोरोना वायरस का असर कम होता है। सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर तैर रहे इस पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि चीन के अस्पतालों में कोरोना के मरीजों को दिन में तीन बार चाय दी जा रही थी।

यह सच है कि चाय में मिथाइलक्सान्थाइन पाया जाता है। यह कॉफी और चॉकलेट में भी पाया जाता है। लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि डॉक्टर ली वेनलियांग इसके कोरोना पर असर को लेकर कोई शोध कर रहे थे। सच तो यह है कि वो आंख के डॉक्टर थे ना कि कोई वायरस पर काम करने वाले विशेषज्ञ और ना ही चीन में कोरोना के मरीजों को अस्पताल में चाय पिलाकर उनका इलाज किया जा रहा था।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed