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हेल्थ अलर्ट: शरीर में पलती रहती हैं ये जानलेवा बीमारियां फिर भी नहीं चलता पता, फिर कैसे जानें खतरा?

Fri, 25 Sep 2026 05:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 25 Sep 2026 05:39 PM IST
सार

कुछ बीमारियां शुरुआती चरणों में बहुत कम या कोई लक्षण नहीं देतीं। क्रॉनिक किडनी डिजीज, फैटी लिवर और शुरुआती सिरोसिस ऐसी ही समस्याएं हैं। आइए जानते हैं कि फिर इन समस्याओं का कैसे पता लगाया जा सकता है?

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Hidden Health Problems You Should Never Ignore know Silent Diseases diagnosis
बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा जो स्वास्थ्य समस्याएं पहले 50-60 की उम्र वालों में देखी जा रही थीं वो अब 30 से पहले भी लोगों को शिकार बनाती जा रही हैं। चूंकि अब बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहने की सलाह दे रहे हैं ताकि बीमारियों का शुरुआत में ही पता लगाया जा सके।



कई बार शरीर के अंदर बीमारी बढ़ रही होती है, लेकिन बाहर से कोई स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि गंभीर बीमारियों का पता भी काफी देर से चल पाता है, जहां से इलाज और मरीज के बचने की संभावनाएं भी काफी कम हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लिवर और किडनी की बीमारियों में ये जोखिम और भी ज्यादा देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि आप अपने खतरे को कैसे जान सकते हैं?

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किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

किडनी-लिवर की बीमारियों का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि किडनी की क्रॉनिक बीमारियों में शुरुआती चरण में ज्यादातर लोगों में कोई खास लक्षण नहीं होते और कई बार बीमारी का पता तब चल पाता है जब आप किसी अन्य समस्या के लिए खून या पेशाब की जांच कराते हैं। 
 

  • इसी तरह लिवर से जुड़ी कुछ बीमारियां भी लंबे समय तक शांति से बढ़ती रह सकती हैं। फैटी लिवर डिजीज में भी अक्सर शुरुआत में बहुत कम या कोई लक्षण नहीं होते जिससे सिरोसिस जैसी गंभीर समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से जरूरी टेस्ट कराते रहने चाहिए।
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किडनी की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या

किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी निकालने का काम करती है। क्रॉनिक किडनी डिजीज में किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। 
 

  • किडनी की बीमरी के शुरुआती चरण में ज्यादातर लोगों में लक्षण नहीं होते। कई लोगों में बीमारी का पता खून और पेशाब की जांच से ही चलता है। 
  • हालांकि बीमारी बढ़ने पर पैरों में सूजन, पेशाब में बदलाव या झागदार पेशाब, थकान या सांस फूलना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 
  • डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के शिकार लोगों में किडनी की समस्याओं का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। अगर आपको ये बीमारियां नहीं हैं फिर भी डॉक्टर से मिलकर नियमित रूप से किडनी की जांच कराते रहें।
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लिवर की बीमारियों का जोखिम - फोटो : Adobe Stock Images

फैटी लिवर और सिरोसिस की दिक्कत

फैटी लिवर की बीमारी में लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगती है। इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी भी कहा जाता है। इसके शुरुआती चरण में भी अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। कुछ लोगों को थकान और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द रह सकता है, जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं।
 

  • फैटी लिवर का अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो इससे सिरोसिस का खतरा हो सकता है, जिसे जानलेवा भी माना जाता है। 
  • अगर आप मोटापे का शिकार हैं, टाइप-2 डायबिटीज है या फिर ज्यादा शराब पीते हैं तो इन बीमारियों का खतरा आपको ज्यादा हो सकता है।
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नियमित रूप से जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com

नियमित रूप से जांच जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  साइलेंट बीमारियों का सबसे बड़ा खतरा यही है कि आप खुद को स्वस्थ समझते रहते हैं, पर बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है।

वैसे तो सभी लोगों को हर बीमारी की जांच की जरूरत नहीं होती। हालांकि जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या परिवार में पहले से किडनी-लिवर की दिक्कत रही हो, उनमें डॉक्टर की सलाह से नियमित रूप से जांच जरूरी हो जाता है। समय रहते बीमारी की पहचान होने से इसका इलाज और मरीज के ठीक होने की संभावना अधिक हो जाती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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