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Hepatitis: लिवर के लिए बेहद नुकसादायक होती है यह बीमारी, जानिए कौन सा हेपेटाइटिस है ज्यादा घातक?

Tue, 26 Jul 2022 10:52 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 26 Jul 2022 10:52 AM IST
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हेपेटाइटिस की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लिवर का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक होता है। लिवर शरीर के आवश्यक अधिकांश रासायनिक स्तरों को नियंत्रित करने के साथ पित्त का उत्पादन करता है। यह लिवर से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने में मदद करता है। लिवर में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। हेपेटाइटिस ऐसी ही एक गंभीर समस्या है जो लिवर में सूजन का कारण बन सकती है। हेपेटाइटिस का संक्रमण एक्यूट (अल्पकालिक) या क्रोनिक (दीर्घकालिक) दोनों हो सकता है।


हेपेटाइटिस की समस्या कई कारणों से हो सकती है। वायरल हेपेटाइटिस इसका सबसे आम प्रकार है। यह कई प्रकार के वायरसों के कारण हो सकता है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, और ई की समस्या लोगों में सबसे आम है। विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के जोखिम अलग-अलग हो सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में हेपेटाइटिस के प्रकार और उससे संबंधित विषयों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

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हेपेटाइटिस ए, लिवर में सूजन की समस्या - फोटो : Social media

हेपेटाइटिस ए की समस्या
हेपेटाइटिस ए वायरस (एचएवी) के कारण होने वाली यह समस्या लिवर में सूजन का कारण बनती है। संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आए दूषित भोजन या पानी के सेवन के कारण यह संक्रमण फैलती  है। संक्रमित को तेज बुखार, भूख न लगने, दस्त-मितली, पेट में परेशानी, गहरे रंग के पेशाब और पीलिया जैसी दिक्कत हो सकती है। वृद्ध लोगों में कुछ गंभीर लक्षण मौत का भी कारण बन सकते हैं। हेपेटाइटिस ए को कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, यह संक्रमण समय के साथ स्वत: ठीक हो जाता है, लक्षणों को कम करने के डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं। 

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हेपेटाइटिस बी में हो सकते हैं गंभीर लक्षण - फोटो : Social media
हेपेटाइटिस बी की समस्या
हेपेटाइटिस बी एक वायरल संक्रमण है जो लिवर में क्रोनिक समस्याओं का कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के कारण होने वाला यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के रक्त वीर्य या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से फैल सकता है। ध्यान दें यह संक्रमण छींकने या खांसने से नहीं फैलता है। संक्रमित मां से बच्चे में भी यह संक्रमण जा सकता है। हेपेटाइटिस बी के लक्षण संक्रमित होने के लगभग एक से चार महीने बाद दिखाई देते हैं। इसमें रोगियों को पेट में दर्द, गहरे रंग के पेशाब, बुखार, जोड़ों का दर्द, भूख न लगने, उल्टी, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं। रोगियों को उपचार के तौर पर एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांस्प्लांट की आवश्यकता हो सकती है।
 
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लिवर में सूजन के कारण होने वाली समस्या (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media

हेपेटाइटिस सी की समस्या 
हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) के कारण होने वाली यह समस्या संक्रमित व्यक्ति के रक्त के माध्यम से फैलती है। क्रोनिक हेपेटाइटिस सी आमतौर पर कई वर्षों तक एक मूक संक्रमण की तरह बना रह सकता है। जब तक कि वायरस लिवर को गंभीर नुकसान न पहुंचा दे तब तक इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। हेपेटाइटिस सी में लोगों को, थकान भूख न लगने, पीलिया, गहरे रंग के पेशाब और त्वचा में खुजली की समस्या हो सकती है। हेपेटाइटिस सी के कुछ रोगियों को लिवर कैंसर की भी समस्या हो सकती है। हेपेटाइटिस सी के निदान के आधार पर डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांस्प्लांट की आवश्यकता हो सकती है।

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हेपेटाइटिस ई वायरस का संक्रमण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock

हेपेटाइटिस ई की समस्या
हेपेटाइटिस ई वायरस (एचईवी) के होने वाली यह बीमारी लिवर के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती है। संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी पीने के कारण इस समस्या का होना सामान्य है। गंभीर मामलों में यह लिवर फेलियर की समस्या का कारण बन सकती है। हेपेटाइटिस ई की समस्याओं से ग्रसित लोगों को पीलिया, जोड़ों में दर्द, भूख न लगना, पेट में दर्द, जी मिचलान-उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। हेपेटाइटिस ई की समस्या वाले लोगों को 21 दिनों के लिए दवा का कोर्स दिया जाता है। हेपेटाइटिस ई के संक्रमण से बचने के लिए लोगों को साफ पानी पीने की सलाह दी जाती है।

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स्रोत और संदर्भ: 
Hepatitis is an inflammation of the liver

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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