पेट में दर्द-गैस, अपच जैसी समस्याएं बहुत कॉमन हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के कारण ऐसी परेशानियां हो सकती हैं, जिसपर अक्सर लोग बहुत कम ध्यान देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कई बार ऐसी छोटी-छोटी दिक्कतों को अनदेखा करना आगे चलकर बड़ी और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है?
जरूरी सलाह: पेट का इन्फेक्शन कहीं बन न जाए कैंसर? नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर ने बताए बचाव के जरूरी उपाय
H. Pylori Infection & Cancer: नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. बैरी मार्शल ने एच पाइलोरी संक्रमण की समय रहते पहचान और इलाज के महत्व पर जोर दिया है। यह बैक्टीरिया पेट में लंबे समय तक संक्रमण पैदा कर सकता है और कुछ लोगों में अल्सर तथा पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। समय पर जांच और उपचार गंभीर खतरों को कम कर सकते हैं।
एच.पाइलोरी संक्रमण से कैंसर का खतरा
गौरतलब है कि डॉ. बैरी मार्शल ने साल 2005 में रॉबिन वारेन के साथ मिलकर नोबेल पुरस्कार जीता था। उन्होंने ही दुनिया को बताया था कि पेट में अल्सर (घाव) और सूजन एसिडिटी की वजह से नहीं, बल्कि एच पाइलोरी बैक्टीरिया के कारण होते हैं।
डॉ. मार्शल के मुताबिक, यदि यह इन्फेक्शन पेट में कई वर्षों तक बना रहे, तो यह पेट के भीतर 'क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन' (लगातार सूजन) पैदा करता है, जो आगे चलकर गैस्ट्रिक कैंसर का रूप ले लेती है। हालांकि अगर समय रहते लक्षणों की पहचान करके इसका इलाज कर दिया जाए तो पेट के कैंसर जैसे गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है।
अब सवाल ये है कि आखिर यह बैक्टीरिया शरीर में कैसे पहुंचता है, कितना खतरनाक है और इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी या एच. पाइलोरी एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो पेट की अंदरूनी परत में संक्रमण पैदा करता है। यह दुनियाभर में बेहद आम संक्रमण में से एक है। कई लोगों में संक्रमण के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
- कुछ लोगों में यह लंबे समय तक गैस्ट्राइटिस, पेट में जलन, दर्द या अपच की वजह बन सकता है।
- एच. पाइलोरी संक्रमण पेप्टिक अल्सर को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। पेप्टिक अल्सर के कारण पेट या डुओडेनम (छोटी आंत के पहले हिस्सा) की परत में दर्दनाक घाव हो सकता है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण पेट की कोशिकाओं में बदलाव करके कुछ लोगों में आगे चलकर पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाला भी पाया गया है।
एच. पाइलोरी संक्रमण क्यों होता है?
एच. पाइलोरी संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। दूषित भोजन या पानी, स्वच्छता में कमी और संक्रमित व्यक्ति की उल्टी के संपर्क में आने से ये दूसरे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।
- यह बैक्टीरिया लार, मल और दांतों पर जमी प्लाक में पाया जा सकता है।
- यदि कोई व्यक्ति शौच करने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह नहीं धोता और उसके हाथों के माध्यम से यह बैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति तक पहुंचकर संक्रमण फैल सकता है।
संक्रमण से बचाव कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एच. पाइलोरी संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई, साफ पीने का पानी और स्वच्छ भोजन महत्वपूर्ण है।
- खाना खाने और टॉयलेट के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाएं और दूषित पानी से बचना भी जरूरी है।
- यदि जांच में एच. पाइलोरी संक्रमण की पुष्टि होती है, तो डॉक्टर आमतौर पर बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक और कुछ दूसरी जरूरी दवाएं दे सकते हैं।
- जिन लोगों को एच. पाइलोरी का इन्फेक्शन है, उन्हें पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा करने या पाचन को धीमा करने वाली चीजों से बचाव की सलाह दी जाती है।
- मसालेदार, एसिडिक और ज्यादा फैट वाली चीजें पेट के लिए दिक्कतें और बढ़ा सकती हैं, इसलिए इनसे बचाव करना जरूरी माना जाता है।
-------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।