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Heart Attack Symptoms: आंखों में ऐसे बदलाव हो सकते हैं हार्ट अटैक का संकेत, इन लक्षणों को लेकर भी रहें अलर्ट

Sun, 06 Mar 2022 06:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 06 Mar 2022 06:00 PM IST
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heart attack symptoms in eyes , all you need to know about heart attacks risk
आंखों में हार्ट अटैक के लक्षण जानिए - फोटो : iStock

जीवनशैली और आहार संबंधी गड़बड़ी के चलते पिछले एक दशक में हृदय रोगों के मामले काफी बढ़ गए हैं। एक समय जहां हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर देखा जा रहा था, वहीं अब काफी कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। हृदय रोगों के कारण गंभीर स्थितियों में हार्ट अटैक की समस्या हो सकती है, जिसे जानलेवा माना जाता है। धमनियों में रुकावट के कारण जब हृदय में रक्त का संचार बाधित हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप या कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसे कई कारणों से इस तरह की समस्या हो सकती है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अगर जीवनशैली और आहार को ठीक रखा जाए तो हृदय रोग और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा अगर हृदय रोगों का समय पर निदान और इलाज हो जाए तो इसके बढ़ने और हार्ट अटैक जैसे खतरे से बचाव करना आसान हो सकता है। छाती में दर्द, सांस की दिक्कत जैसे कई लक्षण हृदय रोगों का संकेत माने जाते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि आंखों के माध्यम से भी हार्ट अटैक के जोखिम का पता लगाया जा सकता है? आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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हार्ट अटैक की समस्या को पहचानिए - फोटो : istock

हृदय रोगों का अंदाजा लगाना आसान
इंपीरियल कॉलेज लंदन में नेशनल हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने बताया कि सी-रिएक्शन प्रोटीन (सीआरपी) के स्तर की जांच के आधार पर करीब तीन साल पहले ही हृदय रोगों के जोखिमों का पता लगाना आसान हो सकता है। सीआरपी के माध्मय से इंफ्लामेशन का पता लगाया जाता है। सीआरपी एक प्रोटीन है जिसकी मात्रा हृदय रोगों के दौरान रक्त में बढ़ जाती है। सीआरपी टेस्ट के माध्यम से हृदय रोग के जोखिम के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। 

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आंखों से हार्ट अटैक का अंदाजा (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

आंखों से हार्ट आटैक का अंदाजा
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि आंखों के माध्यम से भी हार्ट अटैक के जोखिम को अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली। विशेषज्ञों ने पाया कि जिन लोगों के रेटिना की रक्त वाहिकाओं में समय के साथ परिवर्तन हो जाता है, उनमें हृदय रोग और दिल के दौरे का जोखिम अधिक हो सकता है। लीड्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार एआई सिस्टम आंखों का स्कैन करके एक साल पहले दिल के दौरे के जोखिम का पता लगा सकता है।

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हार्ट अटैक के लक्षणों को जानिए - फोटो : Pixabay

हार्ट अटैक के इन लक्षणों पर भी रखें नजर
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार ऐसे लक्षण भी हार्ट अटैक की ओर संकेत करते हैं, जिनके बारे में सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए। 

  • छाती या बाहों में दबाव, जकड़न, दर्द की अनुभूति जो धीरे-धीरे गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकती है।
  • मतली, अपच, हार्टबर्न या पेट दर्द।
  • सांस लेने में कठिनाई।
  • अधिक पसीना आना।
  • थकान महसूस होना।
  • चक्कर आना।
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हृदय को रखें स्वस्थ और सुरक्षित - फोटो : Pixabay

हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हृदय रोग या हार्ट अटैक से बचे रहने के लिए जीवनशैली को स्वस्थ रखना सबसे आवश्यक माना जाता है। इसके लिए स्वस्थ आहार का सेवन, वजन को संतुलित रखने, धूम्रपान न करें, नियमित रूप से व्यायाम, तनाव प्रबंधन जैसे उपाय फायदेमंद हो सकते हैं। उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य स्थितियां हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती हैं, इनसे भी सुरक्षित रहने की आवश्यकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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