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Coronavirus: कोरोना काल में कम हुए हैं हार्ट अटैक के मामले, आंकड़ों ने चौंकाया, विशेषज्ञों ने बताए पांच बड़े कारण

Wed, 12 Aug 2020 06:35 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Wed, 12 Aug 2020 06:35 PM IST
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Heart attack cases decrease by 30 percent in Coronavirus Lockdown Era, Know here risk factors and
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना महामारी की शुरुआत से ही यह बात बताई जा रही है कि दिल के मरीजों को कोरोना संक्रमण होने पर ज्यादा खतरा रहता है। दूसरी ओर एक राहत भरी बात यह सामने आई है कि इस कोरोना काल में हार्ट अटैक के मामले 30 फीसदी कम हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में न केवल भारत में हर्ट अटैक के मामले कम हुए, बल्कि विदेशों में भी यही स्थिति सामने आई है। डॉक्टर और विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण हमारी जीवनशैली में आए सुधार बड़ी वजह हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि फिलहाल हर्ट अटैक के जो ज्ञात जोखिम कारक हैं, उनसे बचने की जरूरत है।

Heart attack cases decrease by 30 percent in Coronavirus Lockdown Era, Know here risk factors and
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • 'एशिया पेसेफिक वैस्कुलर इंटरवेंशन सोसाइटी' के संयोजन में पिछले दिनों हुए हुए एक वेबिनार में दुनियाभर के 10 हजार हृदय रोग विशेषज्ञों ने कोरोना काल और उससे पूर्व समय में होने वाले हार्ट अटैक के तुलनात्मक अध्ययन पर चर्चा की। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक लाख में से 433 युवाओं को हार्ट अटैक से मौत होने का खतरा है। 45 से 50 फीसदी मामलों में बिना लक्षण वाले हार्ट अटैक आते हैं। हार्ट अटैक को लेकर ऐसे ही कई और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 
Heart attack cases decrease by 30 percent in Coronavirus Lockdown Era, Know here risk factors and
heart attack - फोटो : social media
  • चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिका के प्रो. फरीद मुराद, अपोलो ग्रुप के सलाहकार और हृदयरोग विभागाध्यक्ष प्रो. एनएन खन्ना समेत कई विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि हार्ट अटैक के मरीज या तो बहुत कम हो गए हैं या फिर अस्पतालों में कम पहुंच रहे हैं। दरअसल, हार्ट अटैक के लिए ट्रिगर माने जाने वाले कई रिस्क फैक्टर मतलब जोखिम कारक, जैसे कि बाहर का खानपान, प्रदूषण जैसी चीजें कोरोना काल में नहीं के बराबर हुई हैं। इस वजह से जो लोग पहले से ही हर्ट अटैक के रिस्क फैक्टर में थे, उन्हें राहत मिली। 
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Heart attack cases decrease by 30 percent in Coronavirus Lockdown Era, Know here risk factors and
heart attack
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, लॉकडाउन हार्ट अटैक रोगियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। अब विस्तार से इस बात का पता लगाने की कोशिश हो रही है कि वे कौन से जोखिम कारक हैं जो कोरोना काल में कम हुए हैं और जिसका सीधा असर साइलेंट यानी बिना लक्षणों वाले हर्ट अटैक पर हुआ है। 'एशिया पेसेफिक वैस्कुलर इंटरवेंशन सोसाइटी' की ओर से इसके अध्ययन के लिए टीम का गठन किया गया है। 
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कैसे आता है हार्ट अटैक?

  • दिल में ब्लड की आपूर्ति न होने पर दिल की मांसपेशियों का खराब होना, हृदय की धमनियों और नसों में खून के थक्के जमने से हार्ट अटैक आ सकता है। सही समय पर कदम उठाने से हार्ट अटैक का इलाज संभव है, लेकिन कई बार समय रहते पीड़ित को अस्पताल न पहुंचाया जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है।
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