डॉ. परवेश मलिक
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
इन दिनों आप एक बात काफी सुन रहें होंगे कि टीवी एक्ट्रेस और द कपिल शर्मा शो फेम सुमोना चक्रवर्ती एंडोमेट्रिओसिस नाम की बीमारी से पीड़ित हैं, और वो इसकी चौथी स्टेज से गुजर रही हैं। अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए सुमोना ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया था कि वे साल 2011 से इस समस्या से पीड़ित हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एंडोमेट्रिओसिस नाम की बीमारी होती है क्या है? इसके लक्षण क्या है? और इसका इलाज कैसे होता है? शायद नही, तो चलिए हम आपको इन सबके बारे में बताते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
क्या होता है एंडोमेट्रिओसिस?
- दरअसल, एंडोमेट्रिओसिस नाम की बीमारी एंडोमेट्रिओसिस यूट्रस की एक समस्या है। गर्भाशय की लाइनिंग को एंडोमेट्रियम कहते हैं। वहीं, जब गर्भाशय की लाइनिंग बनाने वाले ऊतकों की ग्रोथ असामान्य हो जाती है, तब ये टिश्यूज गर्भाशय के बाहर तक फैलने लगते हैं। यही नहीं, कई बार तो एंडोमीट्रियम की ये लाइनिंग ओवरी, पेल्विस, बाउल समेत अन्य प्रजनन अंगों तक फैल जाती है। ऐसे में एंडोमेट्रियोसिस की समस्या पैदा होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ये हैं लक्षण
- इसके कई लक्षण हैं, जिनके जरिए हम इस बीमारी को पहचान सकते हैं। इसमें पेल्विक हिस्से में दर्द होना, पीरियड्स के पहले और इस दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द का होना, पीरियड्स के दौरान कमर के निचले हिस्से में दर्द होना, मासिक धर्म के एक या दो हफ्ते के आसपास ऐंठन होना, पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होना, इनफर्टिलिटी, यौन संबंध बनाने के दौरान दर्द होना आदि इसमें शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
इससे गर्भधारण में समस्या हो सकती है
- आमतौर पर ये समस्या शरीर की आंतरिक कमी की वजह से होती है। वहीं, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एंडोमेट्रियोसिस फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक कर सकता है। इसके अलावा ये लिम्फ नोड्स, ओवरी और पेरिटोनियम पर भी अपना असर डालता है। वही, इसमें सूजन भी होती है और जिसके कारण कई बार स्पर्म या एग को भी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में इन समस्याओं के चलते महिला को गर्भधारण करने में समस्याएं हो सकती है।
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इलाज कैसे होता है?
- एंडोमेट्रियोसिस का वैसे तो कोई सटीक इलाज नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि विशेषज्ञ इसमें कुछ करते नहीं हैं, बल्कि वो इस बीमारी के शुरुआती समय से ही कुछ दवाओं की मदद से इस बीमारी को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जबकि कई बार तीसरी और चौथी स्टेज में सर्जरी भी करनी पड़ सकती है, जिसमें लेप्रोस्कोप के माध्यम से ही सर्जरी की जाती है। सर्जरी के जरिए ही इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है, और इससे कंसीव करने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से व्यायाम और सिकाई करने के लिए भी कहा जाता है, क्योंकि इनसे भी इस समस्या में काफी राहत मिलती है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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