ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) एक गंभीर संक्रामक रोग है इसके मामलों में पिछले कुछ वर्षों में उछाल देखा गया है। भारत ने इस साल (2025) तक देश से टीबी उन्मूलन या टीबी को खत्म करने का लक्ष्य बनाया था, हालांकि जिस तरह से हाल के वर्षों में मामलों में उछाल आया है इससे ये लक्ष्य काफी दूर नजर आ रहा है।
Tuberculous: स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताए 10 संकेत, इनमें से चार भी हैं तो हो सकता है टीबी; तुरंत कराएं जांच
टीबी या तपेदिक एक संक्रामक रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के बारे में लोगों को जागरूक करते हुए 10 लक्षण बताए हैं, जिनपर ध्यान देते रहना सभी के लिए जरूरी है। अगर इनमें से कुछ हफ्तों से 3-4 लक्षण भी बने हुए हैं तो इसकी जांच जरूर कराएं।
टीबी से मौत के मामलों में आई है कमी
स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया था कि-
2015 की तुलना में 2023 में टीबी के कारण होने वाली मौतों में भी 21 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। सरकार के निरंतर प्रयासों के चलते देश में टीबी उपचार कवरेज भी 32 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। बड़ी संख्या में लोग ऐसे भी हैं जिन्हें बीमारी तो है पर उनका निदान नहीं किया गया, ऐसे लोगों का पता लगाने और उपचार प्रदान करने की दिशा में भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। टीबी को देश से खत्म करने के लिए सभी लोगों को साथ आने का भी आह्वान किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देना, समय पर निदान और इलाज करना बहुत जरूरी है।
टीबी के इन लक्षणों को जरूर जानिए
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के बारे में लोगों को जागरूक करते हुए 10 लक्षण बताए हैं, जिनपर ध्यान देते रहना सभी के लिए जरूरी है। अगर इनमें से कुछ हफ्तों से 3-4 लक्षण भी बने हुए हैं तो इसकी जांच जरूर कराएं। समय पर टीबी की पहचान होने पर रोग के गंभीर रूप लेने का खतरा कम हो सकता है।
- लगातार दो हफ्ते तक खांसी
- शाम को बुखार
- वजन का तजी से कम होना
- थूक के साथ खून आना
- रात को पसीना आना
- थकान और कमजोटी महसूस होना
- शरीर के किसी भी भाग में गांठ होना
- सीने में दर्द
- हाल में हुए शारीरिक बदलाव
- सांस से संबंधित क्रॉनिक बीमारी
स्वास्थ्य मंत्रालय कहता है, टीबी का इलाज संभव है, स्वस्थ भविष्य के लिए आज ही कदम उठाएं और लक्षणों की पहचान करके समय रहते इलाज प्राप्त करें। टीबी के बारे में अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-11-6666 पर कॉल भी कर सकते हैं।
किन्हें टीबी का खतरा अधिक होता है?
टीबी या तपेदिक एक संक्रामक रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों को भी इससे नुकसान पहुंच सकता है। यह रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है।
कई स्थितियों में देखा गया है कि रोग शरीर में मौजूद होता है लेकिन कोई लक्षण नहीं दिखते। यह स्थिति वर्षों तक बनी रह सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने पर सक्रिय रूप ले सकती है।
डॉक्टर बताते हैं, कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोग जैसे एचआईवी/एड्स, कुपोषण, डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार लोगों को टीबी होने का खतरा अधिक होता है।
(50% लोगों में बिना खांसी-बलगम को हो रही है टीबी, फेफड़े के अलावा इन अंगों में भी हो रहा संक्रमण)
टीबी से बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप कुछ आसान से उपायों पर ध्यान देकर टीबी के खतरे को कम कर सकते हैं।
- खराब जीवनशैली, खराब पोषण, धूम्रपान-शराब और नशीली दवाओं का सेवन टीबी के जोखिम को बढ़ाते हैं।
- भीड़-भाड़ और खराब वेंटिलेशन वाले स्थान पर जाने से बचें। बैक्टीरिया बंद और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अधिक फैलता है।
- जिन लोगों को पहले टीबी हो चुका है उनमें दोबारा इसके होने का खतरा अधिक होता है।
टीबी मुख्यतः हवा के माध्यम से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता-छींकता या बोलता है, तो उसके मुंह से बैक्टीरिया युक्त ड्रॉपलेट्स निकलती हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए अगर किसी को टीबी है तो उससे उचित दूरी बनाए रखना या पास जाते समय मास्क पहनना बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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