हर रोज सुबह होने के बाद कैलेंडर की तारीख भी बदल जाती है। ऐसे ही दिन, हफ्ते, महीने और साल बीत जाते हैं। लेकिन साल 2019 में भारत को कई गंभीर बीमारियों ने तबाही मचा दी। चमकी बुखार से लेकर निपाह वायरस जैसी खतरनाक बीमारियों से देश को कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन बीमारियों की वजह से न जाने कितने लोगों की जान चली गई। आइए एक नजर उन चुनौतियों पर डालते हैं जिससे देश को गुजरना पड़ा।
अलविदा 2019: निपाह वायरस से लेकर चमकी बुखार तक, इन बीमारियों ने पूरे साल मचा रखी थी तबाही
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निपाह वायरस
साल 2019 में निपाह वायरस ने करीब 17 लोगों की जान ले ली। इस वायरस के चपेट में आने से 2018 में भी 13 लोगों की मौत हो गई थी। निपाह एक ऐसा वायरस है जो जानवर से इंसान में फैलता है। चमगादड़ जब कोई फल खाते हैं तो उसमें अपना लार छोड़ देते हैं, जिससे फल संक्रमित हो जाता है। जब इस संक्रमित फल को कोई इंसान खा लेता है तो वो निपाह वायरस के चपेट में आ जाता है। निपाह प्रभावित लोगों या जानवरों के लिए अभी तक कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है। इस संक्रमण के लिए सिर्फ लक्षणों और सपॉर्टिव केयर को ध्यान में रखकर ही उपचार किया जाता है। भारत में इस संक्रमण से औसत मृत्यु दर 75 फीसदी से ज्यादा रही है।
निपाह वायरस से बचाव के तरीके
पक्षियों या जानवरों का चखा/खाया/खुरचा हुआ फल न खाएं।
उस व्यक्ति के नजदीक न जाएं जो इस वायरस से पीड़ित हो।
इस वायरस की वजह से जिनकी मौत हुई हो, उनके शव से भी दूर रहें।
पीड़ित व्यक्ति के नजदीक जाना पड़े तो मुंह पर मास्क और हाथों में ग्लब्स पहनें।
अगर तेज बुखार हो तो तुरंत अस्पताल जाएं।
चमकी बुखार
चमकी बुखार का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होता है। इस बीमारी को विज्ञान की भाषा में एक्यूट इनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है। साल 2019 में इस बीमारी ने बिहार में तबाही मचा दी। इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 175 के पार पहुंच गई थी। बिहार में मानसून के दस्तक के बाद इस बुखार का प्रभआव कम हो गया। इस बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है। बदन में ऐंठन होती है। बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। इससे उसे झटके लगने लगते हैं। इसकी वजह से सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब हो जाता है।
चमकी बुखार में क्या करें
बुखार आने पर बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लेटाकर अस्पताल ले जाएं।
बच्चे को बेहोशी की हालत में छायादार स्थान पर लेटाकर रखें।
बुखार आने पर बच्चे के शरीर से कपड़े उतारकर उसे हल्के कपड़े पहनाएं।
बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में कुछ न डालें।
मरीज के बिस्तर पर न बैठें और न उसे बेवजह तंग करें।