हाल के महीनों में निपाह वायरस के प्रकोप के बाद दक्षिणी राज्य केरल से एक और गंभीर संक्रामक रोग का मामला सामने आ रहा है। शनिवार (16 अगस्त) को अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी केरल के कोझिकोड जिले में अमीबिक इंसेफेलाइटिस संक्रमण के कारण दो दिन पहले नौ साल की एक बच्ची की मौत हो गई। ये एक दुर्लभ प्रकार का मस्तिष्क का संक्रमण है, जो संक्रमित दूषित जल में पाए जाने वाले अमीबा के कारण होता है।
Amebic Encephalitis: केरल में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' का खतरा, एक बच्ची की मौत; जानिए इस घातक बीमारी के बारे में
- केरल के कोझिकोड जिले में अमीबिक इंसेफेलाइटिस संक्रमण के कारण नौ साल की एक बच्ची की मौत हो गई है। ये एक दुर्लभ प्रकार का मस्तिष्क संक्रमण है, जो संक्रमित दूषित जल में पाए जाने वाले अमीबा के कारण होता है। इसे 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' के नाम से भी जाना जाता है।
इस साल का चौथा मामला
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, हम उस जलाशय की पहचान करने कोशिश कर रहे हैं जहां के दूषित पानी के कारण बच्ची को यह रोग हुआ था। जलाशय की पहचान हो जाने के बाद, हम उन लोगों की तलाश करेंगे जिन्होंने हाल ही में उसमें स्नान किया होगा, ताकि उन्हें इस जानलेवा संक्रमण के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।
अधिकारी ने बताया कि इस साल जिले में दुर्लभ मस्तिष्क संक्रमण का यह संभवतः चौथा मामला है। पिछले साल भी केरल के कई जिलों में इस संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए थे।
अमीबिक इंसेफेलाइटिस के बारे में जानिए
मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक अमीबिक इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क का एक दुर्लभ और घातक संक्रमण है । इसे मोटे तौर पर प्राथमिक अमीबिक मेनिंगोइंसेफेलाइटिस (पीएएम) और ग्रैनुलोमैटस अमीबिक इंसेफेलाइटिस (जीएई) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
अमीबिक इंसेफेलाइटिस या प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस (पीएएम), नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा के संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। यह संक्रमण मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करने लगता है जिससे ज्यादातर मामलों में मस्तिष्क में गंभीर सूजन और मृत्यु हो जाती है।
आंकड़ों से पता चलता है कि वैसे तो ये दुर्लभ है पर ये आमतौर पर स्वस्थ बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों में हो सकता है। संक्रमण की आशंका तब अधिक हो सकती है जब दूषित पानी नाक में प्रवेश कर जाता है। पानी में गोते लगाने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
संक्रमितों को क्या दिक्कतें होती हैं?
अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि संक्रमितों में शुरुआती लक्षण आमतौर पर फ्लू की तरह होते हैं जिसमें सिरदर्द, बुखार, मतली और उल्टी की दिक्कत हो सकती है। गंभीर स्थिति में गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे पड़ने, कोमा जैसी मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं और पांच से 18 दिनों के भीतर संक्रमण घातक हो सकता है।
मस्तिष्क की सूजन के कारण दौरे पड़ सकते हैं। कुछ संक्रमितों में हेलुसिनेशन और शरीर का संतुलन बनाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
बचाव के लिए विशेषज्ञों ने दी सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधान करते हुए कहा, बच्चों को तालाब या ठहरे हुए पानी में नहाने से बचना चाहिए। स्विमिंग पूल और वाटर थीम पार्क में पानी को नियमित रूप से क्लोरीनेट करते रहना भी जरूरी है। दूषित पानी के संपर्क में आने के कारण इस संक्रमण का खतरा होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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