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जब शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है एंटीबॉडी, कोरोना से ठीक हुए मरीजों को हो रहा जीबी सिंड्रोम

Sat, 09 Jan 2021 05:19 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Sat, 09 Jan 2021 05:19 PM IST
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GB syndrome found in patients recovering from coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

कोरोना वायरस महामारी ने पूरी दुनिया में जमकर कोहराम मचाया। यहां तक कि भारत देश भी इससे अछूता नहीं रह सका। लंबे समय तक लॉकडाउन लगाने के बाद भी देश में मरीजों की संख्या एक करोड़ को पार कर चुकी हैं। लेकिन सबसे अच्छी बात ये है कि मरीजों के ठीक होने की रफ्तार संक्रमित मरीजों के मुकाबले काफी अच्छी है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा मामला सामने आया। जहां कोरोना से ठीक हुए मरीजों में जीबी सिंड्रोम नजर आए। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

GB syndrome found in patients recovering from coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

दरअसल, कोरोना से ठीक हुआ मरीजों में जीबी सिंड्रोम के मामले सामने आने लगे हैं। आपक बता दें कि इसमें एंटीबॉडी शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है। यहां तक कि इस बीमारी से मरीज के गर्दन के नीचे का हिस्सा कुछ ही दिन में लकवाग्रस्त हो जाता है। कोरोना को मात देकर जो लोग घर लौटे हैं, उनको सांस फूलने की तकलीफ के बाद अब उनमें जीबी सिंड्रोम के लक्षण दिखने लगे हैं।

GB syndrome found in patients recovering from coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

भोपान में ही बीते तीन महीनों में इस तरह के पांच मरीज मिले हैं। इनमें से चार मरीज तो ठीक हो चुके हैं, लेकिन एक रोगी अब भी अस्पताल में ही भर्ती है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, पिछले तीन महीने में कोरोना वायरस को मात देकर जो मरीज घर लौटे उनमें से दो मरीजों को जीबी सिंड्रोम के लक्षण थे और वो अस्पताल में भर्ती हुए थे। दोनों मरीजों को आईवीआईजी इंजेक्शन दिया गया और उनका इलाज किया गया और लगभग एक महीने बाद दोनों की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई।

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GB syndrome found in patients recovering from coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

हालांकि, जब कई प्रकार के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन होते हैं, तो जीबी सिंड्रोम के मरीज सामने आते हैं, लेकिन कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद इस तरह के मरीज पहली बार सामने आए हैं, जिनमें जीबी सिंड्रोम के लक्षण दिखे। डॉक्टर्स की मानें तो वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण के बाद व्यक्ति के शरीर में जो एंटीबॉडी होती है वो संबंधित वायरस के प्रोटीन से मिलती-जुलती नर्व के प्रोटीन पर आक्रमण कर देती है।

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GB syndrome found in patients recovering from coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि जो शरीर में एंटीबॉडी बनी होती है वो वायरस व संक्रमण को रोकने का काम करती है, लेकिन जीबी सिंड्रोम की स्थिति में ये एंटीबॉडी शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है। ये इतना खतरनाक होता है कि जो मरीज इससे पीड़ित होता है उसे दो हफ्ते के अंदर ही लकवा मार सकता है। इसलिए डॉक्टर्स से लेकर विशेषज्ञ इस स्थिति को बेहद खतरनाक मानते हैं।

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