भारत सहित दुनिया के कई देशों में इस साल की शुरुआत से ही कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर जारी है। अध्ययनों में पाया गया है कि ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स आसानी से वैक्सीनेशन या पहले के संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा को चकमा देकर संक्रमण का कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि दुनियाभर में मौजूद कोरोना की वैक्सीन्स को वायरस के मूल वैरिएंट को लक्षित करके तैयार किया गया है। अब कोरोना वायरस में कई म्यूटेशन्स के साथ नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं जिसके कारण टीकाकरण के बाद भी संक्रमण का जोखिम लगातार बना हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए यूएस एफडीए ने विशेष रूप से ओमिक्रॉन को लक्षित करने वाली वैक्सीन के बूस्टर शॉट को मंजूरी दे दी है।
Omicron Vaccine: अमेरिका ने 'अपडेटेड वैक्सीन' को बिना क्लीनिकल ट्रायल ही दे दी मंजूरी? भारत की भी बड़ी घोषणा
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अपडेटेड बूस्टर वैक्सीन के बारे में जानिए
फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने एक बयान में बताया कि फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना द्वारा निर्मित दो अपडेटेड बूस्टर वैक्सीन को मंजूरी दे दी गई है। दोनों "द्विसंयोजक" टीके हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें सार्स-सीओवी-2 वायरस के दो mRNA घटक हैं। इसमें पहला मूल स्ट्रेन है और दूसरा ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स BA.4 और BA.5 के समान है। इस बूस्टर शॉट को देकर ओमिक्रॉन के कारण बढ़ रहे खतरे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
BA.4 और BA.5 का कहर
गौरतलब है कि ओमिक्रॉन के BA.4 और BA.5 सब वैरिएंट्स के कारण वर्तमान में भारत और अमेरिका सहित दुनिया के कई अन्य देशों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। एफडीए वैक्सीन नियामक डॉ पीटर मार्क्स ने कहा कि, इस बूस्टर वैक्सीन शॉट का लक्ष्य सिर्फ कोरोना के खास वैरिएंट को लक्षित करके संक्रमण पर कंट्रोल करना ही नहीं है बल्कि हमें उम्मीद है कि इन टीकों के माध्यम से हम लोगों को लंबी अवधि तक संक्रमण से सुरक्षित रखने में लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
वैक्सीन की मंजूरी पर उठे सवाल
हालांकि यह बूस्टर शॉट कितना असरदार होगा इसपर प्रश्न उठने शुरू हो गए हैं। साइंस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक BA.4/BA.5 बूस्टर शॉट के लिए, कंपनियों ने अब तक सिर्फ पशु आधारित डेटा प्रस्तुत किए हैं। इंसानों पर यह कितने कारगर होंगे इस बारे में डेटा साझा नहीं किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल अगले महीने से शुरू होनी है। इसमें भी संभवतः प्राप्तकर्ताओं के एंटीबॉडी स्तर की जांच की जाएगी, संक्रमण या गंभीर बीमारी के खिलाफ टीके की प्रभावकारिता कितनी रहती है और ये टीके खास वैरिएंट्स से इंसानों को बचाने में कितने कारगर होते हैं, यह अब भी बड़ा सवाल है।
सवाल यह भी है कि बिना पूरी जांच रिपोर्ट के इन वैक्सीन्स को मंजूरी किस आधार पर दी गई है?
भारत में कब मिलेगी ऐसी वैक्सीन?
भारत में इस तरीके से ओमिक्रॉन वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले टीके के बारे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने भी बड़ी घोषणा की है। गुरुवार को उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि हम अगले छह महीने के भीतर ओमिक्रॉन को लक्षित करने वाले खास टीके को लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहे हैं। कोवावैक्स वैक्सीन के ओमिक्रॉन के खिलाफ अच्छे आंकड़े हैं। वैसे तो अब तक की वैक्सीन गंभीर रोगों से सुरक्षा देने में कारगर हैं पर हम ओमिक्रॉन स्पेसिफिक वैक्सीन लॉन्च करने का प्रयास कर रहे हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Omicron booster shots are coming—with lots of questions
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