कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों के मौत के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। डॉक्टर तरह-तरह के उपायों को प्रयोग में लाकर रोगियों की जान बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।रेमडेसिविर इंजेक्शन, मेडिकल ऑक्सीजन, फेवीफ्लू और प्लाजमा थेरपी को डॉक्टर ऐसे ही 'संजीवनी' के रूप में देख रहे हैं, जिससे रोगियों की जान बचाने में काफी हद तक मदद मिल सकती है। हालांकि अब ऐसी खबरें आ रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि प्लाज्मा थेरेपी को जल्द ही भारत में कोविड उपचार की गाइडलाइंस से हटाया जा सकता है।
{"_id":"60a239a18ebc3e2c1b52dfb7","slug":"expert-says-plasma-therapy-is-not-effective-in-covid-treatment","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कोरोना में प्लाज़्मा थेरेपी को लेकर बड़ा खुलासा, डॉक्टर जता रहे ये चिंता","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
कोरोना में प्लाज़्मा थेरेपी को लेकर बड़ा खुलासा, डॉक्टर जता रहे ये चिंता
Mon, 17 May 2021 04:07 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Mon, 17 May 2021 04:07 PM IST
विज्ञापन
कोरोना के इलाज में प्लाजमा थेरपी साबित हो रही बेअसर
- फोटो : istock
प्लाजमा थेरपी को गैर-वैज्ञानिक मान रहे हैं विशेषज्ञ
- फोटो : iStock
प्लाजमा थेरपी को तर्कहीन
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लाज्मा थेरेपी न तो कोविड संक्रमितों के गंभीर लक्षणों को कम करने में प्रभावी है और न ही इससे मृत्यु दर में कमी देखी गई है। इस संबंध में हाल में ही चिकित्सकों के एक समूह ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के.विजयराघवन को लिखित रूप में सूचित किया है कि कोविड के मरीजों को प्लाजमा थेरपी देना 'तर्कहीन और गैर-वैज्ञानिक' है। इसी आधार पर सरकार कोविड उपचार प्रोटोकॉल से प्लाजमा थेरपी को हटाने पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लाज्मा थेरेपी न तो कोविड संक्रमितों के गंभीर लक्षणों को कम करने में प्रभावी है और न ही इससे मृत्यु दर में कमी देखी गई है। इस संबंध में हाल में ही चिकित्सकों के एक समूह ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के.विजयराघवन को लिखित रूप में सूचित किया है कि कोविड के मरीजों को प्लाजमा थेरपी देना 'तर्कहीन और गैर-वैज्ञानिक' है। इसी आधार पर सरकार कोविड उपचार प्रोटोकॉल से प्लाजमा थेरपी को हटाने पर विचार कर रही है।
आईसीएमआर ने भी माना बेअसर
- फोटो : social media
आईसीएमआर भी नहीं है संतुष्ट
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में महामारी विज्ञान और संक्रामक रोगों के प्रमुख समीरन पांडा कहते हैं कि विश्व स्तर पर मिल रहे साक्ष्य प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग का समर्थन नहीं करते हैं। इसके अलावा आईसीएमआर के विशेषज्ञ भी इससे संबंधित उपलब्ध डेटा की समीक्षा कर रहे हैं और फिलहाल उन्हें इससे कोई लाभ जैसे साक्ष्य नहीं मिले हैं। समीरन पांडा बताते हैं कि हमने रिकवरी ट्रायल डेटा की जांच के दौरान भी प्लाजमा थेरपी से कोई लाभ नहीं देखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्लाजमा थेरपी को लेकर पहले भी उठे सवाल
- फोटो : पीटीआई
पहले भी प्लाजमा थेरपी पर उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले पिछले साल सितंबर में भी आईसीएमआर ने एक अध्ययन के दौरान बताया था कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 के गंभीर रोगियों की जान बचाने में विफल रही है। इस संबंध में एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना था परीक्षण के परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि प्लाज्मा थेरपी कोरोना संक्रमण के कारण मरने वाले रोगियों की संख्या को कम कर सकती है।
इससे पहले पिछले साल सितंबर में भी आईसीएमआर ने एक अध्ययन के दौरान बताया था कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 के गंभीर रोगियों की जान बचाने में विफल रही है। इस संबंध में एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना था परीक्षण के परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि प्लाज्मा थेरपी कोरोना संक्रमण के कारण मरने वाले रोगियों की संख्या को कम कर सकती है।
विज्ञापन
प्लाजमा थेरपी के 464 मरीजों पर अध्ययन
- फोटो : Social Media
थेरेपी की प्रभावकारिता जानने के लिए हाल में किया गया अध्ययन
भारत ने प्लाज्मा थेरेपी की प्रभावकारिता जानने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण किया। देशभर के 39 केंद्रों में 22 अप्रैल से 14 जुलाई के बीच 464 मरीजों पर यह परीक्षण किया गया। परीक्षण के परिणाम में विशेषज्ञों ने पाया कि जिन लोगों को प्लाजमा मिला और जिन्हें नहीं मिला, उनके मृत्यु दर में इससे कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं आता है।
भारत ने प्लाज्मा थेरेपी की प्रभावकारिता जानने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण किया। देशभर के 39 केंद्रों में 22 अप्रैल से 14 जुलाई के बीच 464 मरीजों पर यह परीक्षण किया गया। परीक्षण के परिणाम में विशेषज्ञों ने पाया कि जिन लोगों को प्लाजमा मिला और जिन्हें नहीं मिला, उनके मृत्यु दर में इससे कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं आता है।