यदि आप भी कोरोना के लक्षणों को सामान्य सर्दी, बुखार समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं। अस्पताल जाने के डर से जांच नहीं करवा रहे हैं, मन में धारणा बनाकर बैठे हैं कि आपको तो कोरोना हो ही नहीं सकता तो आप स्वयं के साथ अन्याय कर रहे हैं क्योंकि आगे चलकर आपको और आपके परिवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। दिल्ली के श्री गंगा राम अस्पताल ने पिछले दिनों यह निरीक्षण किया है कि जिन मरीजों ने शुरुआती लक्षणों को हल्के में लिया है, आगे चलकर उन्हें कोरोना के खतरनाक दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ा है। आइए जानते हैं, कोरोना के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने का क्या होता है प्रभाव।
कोरोना के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर जांच न कराना पड़ सकता है महंगा, जानिए क्यों और कैसे
इस तरह बढ़ जाती हैं शारीरिक समस्याएं
श्री गंगाराम अस्पताल के अनुसार, कई सारे कोरोना पीड़ित ऐसे आ रहे हैं जिन्हें जब सामान्य लक्षण थे, तब उन्होंने सुध ली नहीं परिणामस्वरूप उनकी शारीरिक समस्याएं बढ़ गईं। उनमें उच्च तापमान का बुखार, पैरों में खून के थक्के का जम जाना, ह्रदय संबंधी बीमारियां, शरीर का ठंडा पड़ना, मांसपेशियों में दर्द, फेफड़ों में गड़बड़ आदि समस्याएं सामने आने लगी हैं।
डॉ. अतुल कुमार, उपाध्यक्ष, इंटरनल मेडिसिन विभाग, श्री गंगाराम अस्पताल के मुताबिक, पिछले एक महीने में उन्होंने ऐसे 30 मरीजों का उपचार किया है जिन्हें पहले सामान्य लक्षण थे लेकिन जांच न कराने, लापरवाही करने के बाद कोरोना इन मरीजों के शरीर पर हावी हो गया। कोविड एंटीबॉडी टेस्ट में सभी मरीज पॉजिटिव पाए गए।
मरीजों को देना पड़ती है ऑक्सीजन
मरीज जब इस तरह की लापरवाहियां करते हैं, तब वे अपनी समस्या और भी बढ़ा लेते हैं। चिकित्सक के मुताबिक मरीजों में जब फेफड़ों, ह्रदय, रक्त कोशिकाओं, तंत्रिकाओं संबंधी समस्याएं पाई जाती है तो उनका मामला गंभीर माना जाता है। फेफड़ों की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों का तो कृत्रिम प्राणवायु के बिना इलाज करना असंभव हो जाता है। अन्य मरीजों का भी विशेष ध्यान रखना होता है।
इन बातों का रखें ध्यान
यदि आप कोरोना की जांच नहीं करवाते हैं तो आप ताउम्र के लिए शरीर को अस्वस्थ घोषित कर देते हैं। शुरूआती लक्षणों के दिखने पर ही जांच करवाने और परामर्श लेने से आपके घर पर रहकर स्वस्थ होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। बहुत जरूरी है कि शरीर में यदि छोटे- मोटे बदलाव भी हो रहे हैं, तो उनपर ध्यान दिया जाए। शरीर के संकेतों को पहचानना सीखें।