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21वीं सदी की दुनिया में इस बात से बिल्कुल इंकार नहीं किया जा सकता है कि स्मार्टफोन ने हमारे जीवन को काफी सुविधाजनक बना दिया है। बैंक के काम हों या विदेशों में बैठे लोगों से संपर्क करना, स्मार्टफोन के माध्यम से यह सबकुछ काफी आसान हो गया है। विशेषकर कोरोना के इस काल में जहां ज्यादातर काम अब ऑनलाइन होने लगे हैं, स्मार्टफोन ने लोगों की बड़ी मदद की है। पर यह स्मार्टफोन जितना सुविधाजनक है, डॉक्टर इसे सेहत के लिए काफी नुकसानदायक भी मानते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लंबे समय तक स्मार्टफोन से चिपके रहने की हमारी आदत कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषकर कोरोना के बाद लोगों में स्मार्टफोन के कारण होने वाली समस्याओं का आंकड़ा बढ़ गया है।
डॉक्टरों की मानें तो लंबे समय तक सेल फोन पर स्क्रॉल करते रहने की आदत के चलते लोगों को गले में दर्द और आंखों में सूखापन की समस्या सबसे ज्यादा हो रही है। शारीरिक समस्याओं के साथ फोन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते लोगों में तनाव और चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। आइए आगे की स्लाइडों में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों हम सब को स्मार्टफोन का उपयोग कम से कम करना चाहिए?
अलर्ट: इस वजह से सभी लोगों को फोन का इस्तेमाल कर देना चाहिए कम, विशेषज्ञों ने चेताया
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आंखों को हो सकता है नुकसान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी आंखें काफी नाजुक होती हैं और स्मार्टफोन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। चूंकि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन और आंखों के बीच की दूरी काफी कम होती है जिसके कारण आंखों को क्षति पहुंच सकती है। फोन की स्क्रीन आंखों के फोटोरिसेप्टर को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा फोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण लोगों को सिरदर्द, धुंधला दिखाई देने और आंखों में सूखापन की भी समस्या हो सकती है।
हो सकती हैं त्वचा संबंधी समस्याएं
कई अध्ययन बताते हैं कि सेलफोन पर विभिन्न प्रकार के कीटाणु और जीवाणु मौजूद हो सकते हैं। यह रोगजनक त्वचा सबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। जब आप बात करने के लिए फोन को अपने कानों या गाल के पास रखते हैं तो कीटाणु आपकी त्वचा में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिसके चलते त्वचा पर धब्बे और मुंहासे की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक इस तरह की जोखिम को कम करने के लिए फोन को अल्कोहल वाइप्स से नियमित रूप से साफ करते रहना चाहिए।
बढ़ सकती है अनिद्रा की समस्या
अमर उजाला से एक बातचीत में वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि कोरोना के इस दौर में लोगों में अनिद्रा की समस्या काफी बढ़ गई है। इसके लिए भी बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को मुख्य कारक के रूप में देखा जा सकता है। मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल हमारे नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकता है, जो समय के साथ अनिद्र का कारण बन जाती है। इस तरह की दिक्कतों से बचने के लिए शाम 5 बजे के बाद किसी भी तरह के स्क्रीन जैसे मोबाइल, लैपटॉप, टीवी अदि से दूरी बना लेनी चाहिए। पेड़-पौधों और हरियाली को देखें, इससे आंखों को सुकून मिलता है और स्क्रीन के बढ़े हुए समय के साइड-इफेक्ट्स को कम किया जा सकता है।
तनाव और चिंता का कारक
डॉ सत्यकांत बताते हैं, मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण तनाव और चिंता की समस्या भी लोगों में बढ़ गई है। इसके मुख्यरूप से दो कारण हो सकते हैं। पहला- मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण आपके नींद का पैटर्न खराब हो जाता है। नींद पूरी न हो पाने के कारण मस्तिष्क में होने वाले रसायनिक परिवर्तन तनाव की समस्या को बढ़ा देते हैं। दूसरा- लोगों में सेलफोन एडिक्शन की समस्या भी देखने को मिल रही है, यह भी चिंता और तनाव की स्थिति को उत्पन्न कर सकती है।
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नोट: यह लेख मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।