कोरोना संक्रमण के चलते पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया परेशान है। कोरोना के सामने आए कई वैरिएंट्स के कारण लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट हाल ही में देश में संक्रमण की तीसरी लहर का कारण बना। संक्रमण की रफ्तार भले ही कम हो गई हो लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को अब भी कोरोना के बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ संक्रमण काल के दौरान ही नहीं, संक्रमण कम होने के बाद भी कोविड से बचाव आवश्यक है। कई लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है, जोकि कुछ मामलों में गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकती है।
Covid-19: संक्रमण से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों में देखी जा रही हैं ये तीन समस्याएं, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट
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हृदय की सेहत का रखें ख्याल
अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के बाद लोगों में हृदय रोगों की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। लॉन्ग कोविड के रूप में भी कुछ लोगों में हृदय रोग के लक्षण बने रह सकते हैं। साल 2021 के एक अध्ययन में पाया गया था कि संक्रमण के निदान के बाद लोगों में पहले हार्ट अटैक का जोखिम तीन से आठ गुना बढ़ जाता है। 87,000 लोगों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमण के निदान के एक महीने के भीतर रक्त के थक्के बनने और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम अधिक हो सकता है। संक्रमण से ठीक होने के बाद सभी लोगों को हृदय की सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
बढ़ गए हैं मानसिक स्वास्थ्य के मामले
कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित किया है, इसके लक्षण संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बने रह सकते हैं। विशेषज्ञों ने अवसाद और लॉन्ग कोविड के बीच लिंक पाया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जो लोग COVID-19 से संक्रमित हुए हैं, उनमें चिंता विकार की आशंका तीन गुना और अवसाद की आशंका लगभग दोगना अधिक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि संक्रमण से ठीक होने के बाद कुछ समय तक आपको चिंता-तनाव जैसी समस्याओं का अधिक अनुभव होता रहता है तो इस संबंध में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
तंत्रिकाओं से संबधित लक्षण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19 कुछ मामलों में तंत्रिकाओं की क्षति का भी कारण बन सकता है, जिसके लक्षण लॉन्ग कोविड के रूप में भी देखे जा सकते हैं। मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं लॉन्ग कोविड के रूप में लोगों में पेरिफेरल न्यूरोपैथी से संबंधित लक्षणों का निदान किया। इसके कारण कमजोरी, हाथ-पैर में दर्द और थकान की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड के लक्षण यदि एक माह से अधिक बने रहते हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।