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एम्स के प्रोफेसर ने किया आगाह: बेहद संक्रामक हो सकता है कोरोना का यह वेरिएंट, इन खतरों को भी जानिए

Tue, 22 Jun 2021 05:25 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 22 Jun 2021 05:25 PM IST
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delta plus variant could be more contagious, AIIMS Professor warns
कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media

देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार अब काफी धीमी पड़ चुकी है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना संक्रमण के आंकड़े 1 लाख से कम आ रहे हैं। इसी क्रम में कई राज्यों में लगी पाबंदियों में ढील दी जाने की शुरुआत भी हो चुकी है। हालांकि संभावित तीसरी लहर और कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट अब भी लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर सुभ्रदीप कर्माकर ने डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर लोगों को सचेत किया है।


प्रोफेसर सुभ्रदीप ने बताया कि कोरोना के अब तक के मिले वेरिएंट्स से डेल्टा प्लस वेरिएंट में लोगों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। यह नया वेरिएंट अधिक संक्रामक हो सकता है। कोरोना के मामले देश में भले ही कम हो रहे हैं, लेकिन वायरस अब भी है। इस समय कोई भी लापरवाही गंभीर मुसीबतों को जन्म दे सकती है। आइए इस लेख में जानते हैं प्रोफेसर सुभ्रदीप ने और क्या महत्वपूर्ण बातें बताई हैं? साथ ही क्या इस वेरिएंट से संक्रमित होने वाले लोगों को पहले की तुलना में और गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है?

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डेल्टा प्लस वेरिएंट हो सकता है अधिक संक्रामक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
अधिक संक्रामक हो सकता है वायरस का नया रूप
दिल्ली एम्स के प्रोफेसर सुभ्रदीप ने बताया कि डेल्टा वेरिएंट में  K417N म्यूटेशन के चलते डेल्टा प्लस के मामले सामने आए हैं। ऐसी अटकलें हैं कि यह म्यूटेशन वायरस को अधिक संक्रामक बना रहा है। अल्फा वेरिएंट्स की तुलना में यह 35-60 फीसदी अधिक संक्रामक हो सकता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। इससे खतरे अधिक होने की आशंका है।
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कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
प्रोफेसर सुभ्रदीप कहते हैं, भारत में फिलहाल डेल्टा प्लस वेरिएंट्स के मामले बहुत कम है। इसे अभी भी 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' नहीं। इससे बचाव के सभी उपायों को प्रयोग में लाकर सुरक्षित रहा जा सकता है। यहां आपको बता दें कि 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकरण का मतलब है कि इस वेरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता शक्ति की निगरानी स्वास्थ्य संगठन द्वारा की जा रही है। 

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कैसे हो सकते हैं डेल्टा वेरिएंट्स के लक्षण? - फोटो : iStock
क्या इसके प्रभाव हो सकते हैं अधिक गंभीर?
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वायरस में म्यूटेशन के कारण लोगों को तमाम तरह की गंभीर समस्याओं, जैसे सांस की तकलीफ, फेफड़े और हृदय में दिक्कत और विभिन्न लक्षणों का सामना करना पड़ा था। क्या डेल्टा प्लस से संक्रमित होने वाले लोगों में इसके लक्षण और गंभीर हो सकते हैं? इस बारे में प्रोफेसर सुभ्रदीप बताते हैं कि हर वेरिएंट की क्लिनिकल प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। डेल्टा प्लस के कारण क्या लक्षण होंगे और वह कितना गंभीर रूप ले सकते हैं, इस संबंध में फिलहाल कुछ स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है। हां, इतना जरूर है कि यह नया रूप पहले से ज्यादा संक्रामक जरूर हो सकता है।
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कोरोना से बचाव जरूरी - फोटो : iStock
बचाव के लिए क्या करें
एम्स दिल्ली के प्रोफेसर नीरज निश्चल बताते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को कोविड से बचाव के बताए गए नियमों का सख्ती से पालन करते रहना होगा। इसमें की गई लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अच्छी तरह से और कसे हुए मास्क पहनना, हाथों की साफ-सफाई रखना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना हर समय आवश्यक है। इन उपायों को नियमित रूप से प्रयोग में लाकर संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है। 

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नोट: यह लेख अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर सुभ्रदीप कर्माकर के सुझावों  के आधार पर तैयार किया गया है। खबर में ट्वीट संलग्न हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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