देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार अब काफी धीमी पड़ चुकी है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना संक्रमण के आंकड़े 1 लाख से कम आ रहे हैं। इसी क्रम में कई राज्यों में लगी पाबंदियों में ढील दी जाने की शुरुआत भी हो चुकी है। हालांकि संभावित तीसरी लहर और कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट अब भी लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर सुभ्रदीप कर्माकर ने डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर लोगों को सचेत किया है।
एम्स के प्रोफेसर ने किया आगाह: बेहद संक्रामक हो सकता है कोरोना का यह वेरिएंट, इन खतरों को भी जानिए
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दिल्ली एम्स के प्रोफेसर सुभ्रदीप ने बताया कि डेल्टा वेरिएंट में K417N म्यूटेशन के चलते डेल्टा प्लस के मामले सामने आए हैं। ऐसी अटकलें हैं कि यह म्यूटेशन वायरस को अधिक संक्रामक बना रहा है। अल्फा वेरिएंट्स की तुलना में यह 35-60 फीसदी अधिक संक्रामक हो सकता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। इससे खतरे अधिक होने की आशंका है।
Delta plus has addl mutant K417N, that converts Delta(B.1.617.2) to Delta plus. There are speculations that this mutant is more contagious & it's 35-60% more infectious compared to alpha variant. It could be potentially contagious: Dr Subhradip Karmakar,Dept of Biochemistry,AIIMS pic.twitter.com/RNMFPpcgPA
— ANI (@ANI) June 22, 2021
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वायरस में म्यूटेशन के कारण लोगों को तमाम तरह की गंभीर समस्याओं, जैसे सांस की तकलीफ, फेफड़े और हृदय में दिक्कत और विभिन्न लक्षणों का सामना करना पड़ा था। क्या डेल्टा प्लस से संक्रमित होने वाले लोगों में इसके लक्षण और गंभीर हो सकते हैं? इस बारे में प्रोफेसर सुभ्रदीप बताते हैं कि हर वेरिएंट की क्लिनिकल प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। डेल्टा प्लस के कारण क्या लक्षण होंगे और वह कितना गंभीर रूप ले सकते हैं, इस संबंध में फिलहाल कुछ स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है। हां, इतना जरूर है कि यह नया रूप पहले से ज्यादा संक्रामक जरूर हो सकता है।
Every variant comes with a different kind of clinical response. In the previous variant, the oxygen level was dropping but we don't know what kind of consequences Delta plus variant will come with: Dr Subhradip Karmakar, Associate Professor, Department of Biochemistry, AIIMS pic.twitter.com/l38jvRVKHw
— ANI (@ANI) June 22, 2021
एम्स दिल्ली के प्रोफेसर नीरज निश्चल बताते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को कोविड से बचाव के बताए गए नियमों का सख्ती से पालन करते रहना होगा। इसमें की गई लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अच्छी तरह से और कसे हुए मास्क पहनना, हाथों की साफ-सफाई रखना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना हर समय आवश्यक है। इन उपायों को नियमित रूप से प्रयोग में लाकर संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है।
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नोट: यह लेख अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर सुभ्रदीप कर्माकर के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। खबर में ट्वीट संलग्न हैं।
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