World Lung Cancer Day 2024: वायु प्रदूषण को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता रहा है। ये फेफड़ों-सांस से संबंधित बीमारियों का प्रमुख कारण तो है ही, साथ ही प्रदूषण की वजह से हर साल मौत के आंकड़े भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन के अनुसार, जिस तरह से वायु प्रदूषण के स्तर में इजाफा देखा जा रहा है, उसने कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। 10 प्रमुख भारतीय शहरों में प्रतिदिन होने वाली मौतों में से सात प्रतिशत से अधिक मौतें प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं के कारण ही हो रही हैं।
World Lung Cancer Day: दिल्ली में रहते हैं तो हो जाइए सावधान, इस वजह से बढ़ गए हैं सालाना मौत के आंकड़े
पीएम 2.5 का बढ़ता जा रहा है खतरा
अध्ययनकर्ताओं ने कहा, साल के ज्यादातर महीनों में राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहता है। दिल्ली में दैनिक और वार्षिक मौतों का बड़ा कारण पीएम 2.5 वायु प्रदूषण को माना जा रहा है। 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कण सांस के माध्यम से आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। वाहनों और औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदूषण बढ़ाने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी में हर साल वायु प्रदूषण से जुड़ी करीब 12,000 मौतें दर्ज की जाती हैं, जो कुल मौतों का 11.5 प्रतिशत है।
प्रदूषण के कारण दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम
शोधकर्ताओं ने कहा कि भारतीय शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण के कारण कई अंगों से संबंधित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है। लंबे समय तक प्रदूषकों के संपर्क में रहने के कारण फेफड़ों-हृदय और सांस से संबंधित दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा हो सकता है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और नई दिल्ली के क्रॉनिक डिजीज कंट्रोल सेंटर के शोधकर्ताओं ने साल 2008 से 2019 तक दस भारतीय शहरों में लगभग 36 लाख दैनिक मौतों का विश्लेषण किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विशेषज्ञ और अध्ययन के सह लेखक जोएल श्वार्ट्ज कहते हैं, वायु गुणवत्ता में सुधार करके प्रति वर्ष हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
हृदय और मस्तिष्क के लिए खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करने वाली समस्या नहीं है। इससे हृदय, मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। हार्वर्ड विशेषज्ञों ने बताया, अगर आप प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं तो इससे हमारे मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रमाण बताते हैं कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से संज्ञानात्मक गिरावट और अल्जाइमर-पार्किंसंस सहित न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
इतना ही नहीं कुछ शोध में ये भी कहा गया है कि प्रदूषकों के अधिक संपर्क में रहने के कराण हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Ambient air pollution and daily mortality in ten cities of India: a causal modelling study
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