बहुत मुमकिन है कि अबतक आपको कोविड-19 के लक्षण पता चल गए होंगे। इसके प्रमुख लक्षण हैं - खांसी और बुखार। लेकिन जरूरी नहीं है कि इन लक्षणों का मतलब आपको कोरोना हो गया है। ये सामान्य फ्लू के लक्षण भी हो सकते हैं। लेकिन अगर आपको डर है तो आप क्या कर सकते हैं?
कोरोना वायरस: आप अपनी जांच कहां और कैसे करवा सकते हैं?
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- मान लीजिए आपने 1075 नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले आपसे सबसे पहले आपके लक्षणों के बारे में पूछेंगे। आप किस राज्य के किस जिले के जोन में रहते हैं, ये पूछेंगे।
- इसके बाद आपको अपने जिले के संबंधित अधिकारी या नोडल अफसर का नंबर और मेल आईडी दे दिया जाएगा।
- उनसे आप संपर्क करेंगे तो आपको ये पता चल जाएगा कि आप अपने नजदीक की किस लैब में जाकर टेस्ट करा सकते हैं। ये लैब सरकारी भी हो सकती है और प्राइवेट भी।
- अगर कोई संक्रमित पाया जाता है और आप उसके संपर्क में आए हैं तो प्रशासन आपकी स्वत: जाँच भी कर सकता है।
दूसरा तरीका
अबतक ज्यादातर सरकारी लैब में टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन कुछ प्राइवेट लैब को भी इसकी इजाजत दी गई है। हालांकि आप सीधे प्राइवेट लैब में जाकर टेस्ट नहीं करा सकते। आपको इसके लिए किसी डॉक्टर के प्रेस्क्रिप्शन की जरूरत होगी, जो आपको लिखकर दे कि आपको कोविड-19 का टेस्ट कराने की जरूरत है। इसके आधार पर आप प्राइवेट लैब से टेस्ट करा सकते हैं। प्राइवेट लैब में टेस्ट कराने के लिए आपको 4500 रुपये तक देने होंगे।
लाल पैथ लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद लाल बताते हैं कि कोरोना टेस्ट के लिए आईसीएमआर ने कुछ नियम तय किए हैं। मरीज अगर उन नियमों में फिट होता है तभी डॉक्टर उसे टेस्ट कराने की सलाह देता है। डॉक्टर की लिखित सलाह यानी प्रेस्क्रिप्शन देखने के बाद ही टेस्ट किया जाएगा।
किस-किसके टेस्ट हो सकते हैं?
आईसीएमआर की टेस्टिंग रणनीति के मुताबिक इन लोगों का टेस्ट किया जाएगा। टेस्टिंग स्ट्रेटेजी में सोमवार को कुछ बदलाव भी किए गए हैं -
- जिनमें कोरोना के लक्षण हों (आईएलआई लक्षण) और जो पिछले 14 दिनों के अंदर विदेश से आए हों। आईएलआई लक्षण यानी जिनमें 38 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा बुखार और खांसी के साथ एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन हो।
- जो संक्रमित लोगों के संपर्क में आए हैं और उनमें लक्षण हों (आईएलआई लक्षण)।
- कोरोना को नियंत्रित करने के काम में लगे स्वास्थ्य कर्मी/फ्रंटलाइन वर्कर जिनमें आईएलआई लक्षण हों।
- सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस के मरीज। यानी जिनमें 38 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा बुखार और खांसी के साथ एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन हो और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़े।