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मॉडल्स के लिए सुंदर और आकर्षक दिखना पेशेवर तरीके से बेहद जरूरी होता है। यही कारण है कि शरीर को सुंदर और फिट बनाए रखने के लिए मॉडल्स कई तरह की सर्जरी और उपचार कराती रहती हैं। पर क्या सुंदर दिखने के चक्कर में किसी की मौत हो सकती है? हालिया रिपोर्टस के आधार पर इस बात को स्वीकारा जा सकता है। असल में सोशल मीडिया का चर्चित चेहरा मैक्सिकन इंफ्लूएंशर और बॉडी बिल्डर ओडालिस सैंटोस मेना की मौत कुछ इसी तरह से हुई है। रिपोर्टस के मुताबिक 7 जुलाई को एक सर्जरी के दौरान ओडालिस सैंटोस की मौत हो गई है।
23 वर्षीय ओडालिस के इंस्टाग्राम पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि ओडालिस सैंटोस, अंडरआर्म पसीने को कम करने के लिए इलाज करा रही थीं। मिराड्राई नामक इस उपचार के दौरान कार्डियक अरेस्ट के चलते उनकी मृत्यु हो गई। मिराड्राई उपचार के दौरान हीट एनर्जी का उपयोग किया जाता है। रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि इस उपचार के माध्यम से शरीर की गंध और अंडरआर्म के बालों में भी कमी आ जाती है।
आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि यह उपचार किस तरह से किसी की जान ले सकता है? साथ ही उन समस्याओं से कैसे निजात पाया जा सकता है, जिसका ओडालिस सैंटोस इलाज करा रही थीं?
सावधान: मॉडल के लिए जानलेवा साबित हुआ अंडरआर्म के पसीने का इलाज, जानिए क्या है मिराड्राई ट्रीटमेंट?
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मैक्सिकन इंफ्लूएंशर और मॉडल की इलाज के दौरान मौत
अंडरआर्म के पसीने का इलाज करने वाली प्रक्रिया की सर्जरी के दौरान ओडालिस के शरीर से पसीने की ग्रंथियों को निकालना भी शामिल था। हालांकि द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार सर्जरी के दौरान बेहोशी की दवा दिए जाने के बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। इस खबर के सामने आने के बाद से लोगों के मन में सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या, मिराड्राई उपचार की प्रकिया के कारण किसी की जान जा सकती है? हालांकि ओडालिस सैंटोस के पहले की सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर डालें तो वह कई बार मिराड्राई उपचार को सुरक्षित और प्रभावी बता चुकी हैं।
क्या है मिराड्राई ट्रीटमेंट?
क्या मिराड्राई ट्रीटमेंट जानलेवा हो सकती है, इस बारे में जानने से पहले इस उपचार विधि के बारे में जानना आवश्यक है। अमर उजाला ने मिराड्राई ट्रीटमेंट को समझने के लिए वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ सतीश भाटिया से बातचीत की।डॉ सतीश बताते हैं, इस उपचार में एक नॉन-इनवेसिव हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग किया जाता है जो अंडरआर्म की त्वचा के नीचे उचित मात्रा में विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा उत्पन्न कर देता है। इस प्रक्रिया के कारण पसीने की ग्रंथियों का थर्मोलिसिस (गर्मी के कारण अपघटन) होने लगता है। माना जाता है कि पसीने की ग्रंथियां उपचार के बाद वापस नहीं बढ़ती हैं, ऐसे में रोगी के अत्यधिक पसीने की शिकायत को दूर किया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसके सर्वोत्तम परिणामों के लिए, तीन महीने के अंतराल पर दो बार इस प्रक्रिया को करने की जरूरत हो सकती है।
क्या मिराड्राई ट्रीटमेंट से मौत हो सकती है?
वैसे तो ओडालिस की मौत को लेकर रिपोर्ट में कई कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि इस बारे में डॉ सतीश कहते हैं, मिराड्राई ट्रीटमेंट से मौत का खतरा एक फीसदी के करीब का हो सकता है। सामान्यतौर पर इसे जानलेवा नहीं माना जाता है। मिराड्राई के कारण लोगों को दर्द, जलन और लालिमा जैसे साइड-इफेक्ट्स होते रहे हैं। कई देशों में इस उपचार को प्रयोग में लाया जा रहा है, हालांकि खर्च बहुत अधिक होने के कारण भारत में फिलहाल इसका प्रयोग बहुत ही कम होता है।
पसीने को कम करने के लिए और कौन से उपचार प्रभावी हैं?
डॉ सतीश बताते हैं, विशेषकर अंडरआर्म के पसीने को कम करने के लिए बोटॉक्स नामक उपचार को भारत में ज्यादा प्रयोग में लाया जा रहा है। इस उपचार की प्रक्रिया में इंजेक्शन का उपयोग करके पसीने को उत्पन्न करने वाली तंत्रिकाओं को ब्लाक कर दिया जाता है। मिराड्राई ट्रीटमेंट की तुलना में इस उपचार की प्रक्रिया का खर्च भी काफी कम होता है।
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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्ट और डॉ सतीश भाटिया (वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ, मुंबई) से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।