दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से बढ़ने लगा है। पूरे विश्व में अब तक 12 करोड़ 60 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 27 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इस बीच कई देशों में टीकाकरण अभियान तो चल ही रहे हैं, साथ ही वैक्सीन को लेकर एक और अच्छी खबर भी सामने आ रही है। गुरुवार को इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने रूस के एक मंत्री का हवाला देते हुए बताया कि रूस ने कोरोना की तीसरी वैक्सीन भी बना ली है, जिसका नाम 'कोविवैक' है। बताया जा रहा है कि इसके तीसरे चरण का ट्रायल भी शुरू हो गया है। हालांकि मॉस्को में इसके इस्तेमाल के लिए आपातकालीन स्वीकृति मिल चुकी है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी मंत्री ने बताया कि फिलहाल 'कोविवैक' वैक्सीन का उत्पादन चल रहा है और जल्द ही इसका वितरण शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुमाकोव रिसर्च सेंटर की योजना सालाना इस वैक्सीन की 10 लाख खुराक के उत्पादन की है। इंटरफैक्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चुमाकोव सेंटर के प्रमुख ने बताया कि 'कोविवैक' के तीसरे चरण का ट्रायल इस साल के मध्य तक पूरा हो जाएगा।
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कोरोना वायरस वैक्सीन
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रूस में फिलहाल कोरोना की दो वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है, स्पूतनिक-वी और एपिवैककोरोना। इसमें स्पूतनिक-वी सबसे लोकप्रिय है। इस देश में अब तक 43 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है। गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने दावा किया है कि रूस में नवंबर तक 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण पूरा हो जाएगा।
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चूंकि कोरोना वायरस लगातार अपना रूप बदल रहा है और इसके नए-नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं, लेकिन रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि 'स्पूतनिक-वी' वैक्सीन कोरोना के सभी स्ट्रेन पर असरदायक है। रूस के गमलेया रिसर्च सेंटर ने हाल ही में एक अध्ययन किया था, जिसमें ये पाया गया कि यह वैक्सीन ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन के खिलाफ भी कारगर है।
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माना जा रहा है कि भारत में भी स्पूतनिक-वी के इस्तेमाल को मंजूरी मिल सकती है। यहां इसके तीसरे चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। हैदराबाद स्थित मशहूर दवा कंपनी डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज ने भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मंजूरी मिलने के बाद देश में इसका ट्रायल शुरू किया था।