कोरोना वैक्सीन बनाने के मामले में भारत अन्य देशों के मुकाबले बिल्कुल भी कम नहीं है। हाल ही में भारत बायोटेक की बनाई वैक्सीन 'कोवैक्सिन' को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी है, जिसका इस्तेमाल अब टीकाकरण अभियान में किया जाएगा और अब वैक्सीन को लेकर ही भारत बायोटेक की तरफ से एक और अच्छी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने नेजल वैक्सीन यानी नाक से दी जाने वाली वैक्सीन बना ली है और उसने घोषणा की है कि वह इसके पहले चरण का परीक्षण फरवरी-मार्च में शुरू करेगा। कंपनी ने इसके ट्रायल के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से इजाजत मांगी है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत बायोटक ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर नाक से दी जाने वाली वैक्सीन पर शोध किया और उसके बाद इसे विकसित किया है। भारत में इसके दो चरणों (पहले और दूसरे चरण) के ट्रायल एक साथ करने के लिए मंजूरी मांगी गई है। भारत बायोटेक के मुताबिक, शुरुआत में पुणे, नागपुर, भुवनेश्वर और हैदराबाद जैसे शहरों में इसका ट्रायल किया जाएगा।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, शोध में यह पाया गया है कि कंधे पर इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन के मुकाबले नाक के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन अधिक प्रभावी होती है। बताया जा रहा है कि भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन के ट्रायल के लिए 18 से 65 साल तक के लोगों को वॉलंटियर के तौर पर लिया जाएगा, ताकि ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके। भारत बायोटेक के अध्यक्ष कृष्णा इला के मुताबिक, नाक के रास्ते दिया जाने वाला यह टीका न केवल लगाने में आसान है बल्कि इससे सूई, सीरिंज आदि की भी जरूरत नहीं होगी जिससे टीकाकरण का खर्च कम होगा। उन्होंने कहा कि नाक की दोनों छिद्रों में एक-एक बूंद टीका ही पर्याप्त होगा।
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भारत बायोटेक के मुताबिक, चूहों पर इस वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। बीते सितंबर माह में ही इस वैक्सीन को बनाने वाले शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि नाक के माध्यम से दी जाने वाली यह वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए लगाई जाने वाली वैक्सीन की तुलना में अधिक व्यापक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करती है।
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नाक के जरिए दी जाने वाली इस वैक्सीन को कोरोना की एकल खुराक वैक्सीन कहा गया है। इसे बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने वायरस के स्पाइक प्रोटीन का इस्तेमाल किया है। कोरोना वायरस शरीर की कोशिकाओं पर हमला करने के लिए इसका उपयोग करता है। इसे एडिनोवायरस कहा जाता है। यही सामान्य सर्दी-जुकाम का कारण बनता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाने के लिए एडिनोवायरस के प्रभाव को खत्म कर दिया, जिससे यह बीमारी पैदा करने में असक्षम हो गया।