दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़कर अब सात करोड़ 86 लाख से भी अधिक हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी 17 लाख 30 हजार के पार है। इस बीच ब्रिटेन में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन ने अलग ही चिंता बढ़ा दी है। यह कितना खतरनाक है, इसपर मौजूदा कोरोना वैक्सीन प्रभावी होगी या नहीं, ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब अभी पुख्ता तौर पर मिल नहीं पाए हैं। हालांकि इस नए स्ट्रेन के आने से पहले से ही ब्रिटेन में टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका था, जिसके तहत लाखों लोगों को टीका लगाया भी जा चुका है। ऐसे में सवाल यह भी है कि आखिर वैक्सीन लेने के बाद शरीर पर किस प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब...
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Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन लेने के बाद शरीर पर किस प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं? विशेषज्ञ से जानें
Thu, 24 Dec 2020 07:28 AM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 24 Dec 2020 07:28 AM IST
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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ब्रिटेन में आया वायरस का स्ट्रेन कितना खतरनाक है?
- दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'वायरस के अंदर जीवित कोशिका के गुण होते हैं, जो बढ़ने के लिए मल्टीप्लाई करते रहते हैं। जीवित रहने के लिए वायरस अपने अंदर परिवर्तन लाता है। मल्टीप्लीकेशन में वायरस या तो कमजोर पड़ने लगते हैं या और अधिक खतरनाक होते जाते हैं। किसी भी म्यूटेशन को समझने में समय लगता है। उसका व्यवहार एक या दो दिन में नहीं पता चल सकता है। नया स्ट्रेन कितना खतरनाक होगा, यह अध्ययन के बाद पता चलेगा। हालांकि प्रारंभिक अध्ययन में पता चला है कि यह उतना ज्यादा खतरनाक नहीं है, जितना हम सोच रहे हैं।'
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क्या वायरस के नए स्ट्रेन पर अब तक बन चुकी वैक्सीन प्रभावी होंगी?
- डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'कोविड-19 वायरस से लड़ने के लिए दुनियाभर में तमाम वैक्सीन बनाई गई हैं। अब नए स्ट्रेन के लिए हम पिछले वायरस को छोड़ नहीं सकते हैं। चूंकि अब तक फैल रहे वायरस की इंफेक्टिविटी हमें पता है, वो किस प्रकार लोगों को बीमार करता है, यह भी पता है। इसलिए वैक्सीन के कार्य में बाधा नहीं आएगी। अब अगर कोई नया स्ट्रेन पाया भी जाता है, तो उसके हिसाब से वैक्सीन को दोबारा विकसित कर सकते हैं। नए-नए स्ट्रेन के लिए वैक्सीन बनाना कोई बड़ी बात नहीं है, इंफ्लूएंजा की वैक्सीन तो हर साल बनाई जाती है।'
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वैक्सीन का स्टोरेज कैसे किया जाता है?
- डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'हर वैक्सीन का स्टोरेज अलग तरीके से किया जाता है। फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन अमेरिका में दी जा रही है, उसके लिए माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान चाहिए और पांच दिन के भीतर वैक्सीन लगानी होगी। मॉडर्ना वैक्सीन को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाएगा। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन चार से आठ डिग्री तापमान पर रखी जा सकती है। वैज्ञानिक प्रयास कर रहे हैं कि हर वैक्सीन बराबर से प्रभावी हों, ताकि सुविधा और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से इनमें से कोई न कोई वैक्सीन हर व्यक्ति तक पहुंचाई जा सके।'
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कोविड-19 की वैक्सीन लेने के बाद शरीर पर किस प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं?
- डॉ. नितेश गुप्ता बताते हैं, 'जब भी कोई वैक्सीन लगती है, तो उसके दो तरीके के कॉम्प्लीकेशन होते हैं। पहले इंजेक्शन से जुड़े होते हैं। सुई लगने पर कुछ लोगों को चक्कर आता है, दर्द सहन नहीं होता है तो उल्टी आती है। वहीं दूसरे साइ़ड-इफेक्ट वैक्सीन के होते हैं। ज्यादातर साइड-इफेक्ट पहले 20 मिनट में दिखाई दे जाते हैं। इसलिए दिशा-निर्देशों में भी कहा गया है कि वैक्सीन लगने के बाद 20 मिनट तक मरीज को ऑब्जर्व करना है, उसके बाद घर भेजना है।'