भारत समेत दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले थोड़े बढ़ने तो शुरू हुए हैं, लेकिन यहां तेजी से लोग ठीक भी हो रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर अब 96.95 फीसदी हो गई है। अब तक देश में एक करोड़ आठ लाख से अधिक कोरोना मरीज संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। वहीं, भारत में टीकाकरण अभियान भी काफी तेजी से चल रहा है। यहां अब तक दो करोड़ नौ लाख से अधिक लोगों के टीकाकरण का काम किया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि दूसरे चरण में सिर्फ छह दिनों में 30 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारी वाले चार लाख 60 हजार से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना वायरस और वैक्सीन से जुड़े कुछ सवालों के जवाब...
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बच्चों के लिए वैक्सीन कब तक आएगी, क्या किडनी डोनेट करने वाला भी टीका लगवा सकता है? विशेषज्ञ से जानें
Mon, 08 Mar 2021 12:39 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 08 Mar 2021 12:39 AM IST
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कोरोना वैक्सीन
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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अगर कोई अपनी एक किडनी डोनेट कर चुका हो तो क्या वह वैक्सीन लगवा सकता है?
- डॉ. मोना देसाई कहती हैं, 'जी हां, अगर व्यक्ति 45 साल से ऊपर के हैं तो वैक्सीन लगवानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति एक किडनी के साथ लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन कोविड किडनी को ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए ऐसे लोग सर्टिफिकेट लेकर जाएं और प्राथमिकता से वैक्सीन लगवाएं। इसके अलावा कोरोना से बचने के नियमों का पालन सभी को वैक्सीन लेने के बाद भी करना है।'
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कोविड के बाद ज्वाइंट्स में दर्द रहता है, ऐसे में क्या करना चाहिए?
- डॉ. मोना देसाई कहती हैं, 'अक्सर कोविड से ठीक होने के बाद मांसपेशियों में दर्द होता है, ये पोस्ट-कोविड के लक्षण हैं। इस दर्द को ठीक होने में शायद छह महीने लग सकते हैं। लेकिन परेशान न हों। आयरन, विटामिन, विटामिन-सी, कैल्शियम, विटामिन-डी3 की दवा लें। हाई प्रोटीन डाइट रखें, इसके अलावा व्यायाम करना बहुत जरूरी है। हल्की कसरत करें, टहलने जाएं, क्योंकि अगर बैठे रहेंगे तो दर्द बढ़ता जाएगा।'
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बच्चों के लिए वैक्सीन कब तक आएगी?
- डॉ. मोना देसाई कहती हैं, 'मां-बाप को लगता है कि किसी भी संकट से पहले बच्चों को बचाया जाए, इसलिए अक्सर वो बच्चों को वैक्सीन देने के बारे में पूछते हैं। बच्चों में अभी तक वैक्सीन का ट्रायल नहीं हुआ था, लेकिन अब 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर भी ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है कि अक्तूबर तक बच्चों के लिए भी वैक्सीन आ जाएगी। अभी ये वैक्सीन केवल 18 साल से ऊपर के लोगों को ही दी जा रही है।'
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कोविड मरीजों से उनके घर का कोई सदस्य नहीं मिल पाता था, ऐसे में डॉक्टर की क्या भूमिका रही?
- डॉ. मोना देसाई कहती हैं, 'जी हां, कोविड में ऐसा समय लगभग सबके साथ रहा जब परिवार से दूर रहना पड़ता था। ऐसे में कई बार लोग घबराने लगते थे और स्थिति गंभीर हो जाती थी। ऐसे में महिला डॉक्टर मरीजों को काफी सपोर्ट देती थी, क्योंकि कहते हैं कि जहां दवा काम नहीं आ पाती, वहां प्यार और दुआ काम आती है। इसके परिणाम भी सामने आते थे, महिला डॉक्टर उनकी सेवा करती थी, जिससे उन्हें तनाव न हो और वो वार्ड में भी खुश रहें। उस वक्त डॉक्टर, नर्स अपनी परेशानी भूल कर मरीजों की सेवा करने में लग जाती थीं।'