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भारत में महज 90 दिनों में कैसे बना 'विश्व स्तरीय वेंटिलेटर'? इसके पीछे की कहानी बयां करती है यह किताब

Sun, 07 Mar 2021 08:18 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 07 Mar 2021 08:18 PM IST
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Coronavirus book that tells the story behind making Indian ventilators in just 90 days
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी से निपटने में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का अहम योगदान रहा है। जहां वैज्ञानिकों ने वैक्सीन और तमाम तरह के इलाज ढूंढे, तो वहीं डॉक्टरों ने जी-जान लगाकर कोरोना मरीजों की सेवा की और अभी भी कर ही रहे हैं। एक समय ऐसा आया था जब तमाम देशों में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से लोगों को सही से इलाज नहीं मिल पा रहा था, यहां तक कि जीवन रक्षक उपकरणों की भी कमी हो गई थी। इसी बीच 20 भारतीय मेधावियों ने मिलकर महामारी और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच 'रिकॉर्ड' 90 दिनों में एक विश्व स्तरीय आईसीयू वेंटिलेटर बना कर ये दिखा दिया था कि भारत किसी भी मामले में किसी से कम नहीं है। इसी पर रविवार को एक किताब भी सामने आई है। 

Coronavirus book that tells the story behind making Indian ventilators in just 90 days
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

इस किताब का नाम 'द वेंटिलेटर प्रोजेक्ट: हाउ द आईआईटी कानपुर कंसोर्टियम बिल्ट ए वर्ल्ड क्लास प्रोडक्ट ड्यूरिंग इंडियाज कोविड-19 लॉकडाउन' रखा गया है। श्रीकांत शास्त्री और अमिताभ बंद्योपाध्याय ने इस किताब को लिखा है और पैन मैकमिलन इंडिया ने इसे प्रकाशित किया है। यह किताब कोरोना काल में सभी मुश्किलों के खिलाफ 'नवाचार, आशा, कौशल और सफलता' की कहानी है। कुल 25 अध्याय वाली इस किताब को दो खंडों, 'द नाइंटी डे सागा' और 'बिग होप्स फॉर फ्यूचर' में विभाजित किया गया है। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने इसकी प्रस्तावना लिखी है।  

Coronavirus book that tells the story behind making Indian ventilators in just 90 days
कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay

दरअसल, कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से पिछले साल कई देशों में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसमें भारत भी शामिल था। चूंकि संक्रमण के मामले तो तेजी से बढ़ रहे थे, ऐसे में अस्पताल जीवन रक्षक उपकरणों और कर्मचारियों की कमी से जूझने लगे थे। इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए 29 मार्च को श्रीकांत शास्त्री और अमिताभ बंद्योपाध्याय ने एक युवा स्टार्टअप, 'नोका रोबोटिक्स' की सहायता के लिए 'आईआईटी कानपुर वेंटिलेटर कंसोर्टियम' नामक एक कार्य बल गठित किया, जिसने अस्पतालों के लिए 'विश्व स्तरीय वेंटिलेटर' का निर्माण किया और वो भी बेहद ही 'किफायती'। 

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Coronavirus book that tells the story behind making Indian ventilators in just 90 days
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

जून में उच्च-गुणवत्ता वाले वेंटिलेटर नोकार्क वी310 को बना लिया गया था। किताब में लिखा गया है, 'हमें उम्मीद है कि इस सच्ची कहानी से पता चलता है कि सीमित समय, संसाधनों और बुनियादी ढांचे में सफलता कैसे मिल सकती हैं, कैसे लोगों को नवाचार और बदलाव के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती है। यह निरंतर और त्वरित बदलाव के साथ नए भविष्य से जुड़ी एक प्रासंगिक और काम करने के नए तरीके की कहानी है।' 

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