कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से भारत समते विश्व के कई देश परेशान हैं। इस खतरनाक वायरस की काट खोजने में हर देश के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगे हुए हैं। इसी बीच अमेरिकी शोधकर्ताओं ने इस घातक वायरस से लड़ने के लिए चार नए तरीके के इलाज बताए हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना संक्रमितों में खून के थक्के बनने के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। इसे दवाओं से कंट्रोल कर स्थिति में सुधार की जा सकती है। आइए जानते हैं कोरोना को हराने के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक क्या कुछ कर रहे हैं?
कोरोना से जंग: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के बाद खून पतला करने वाली दवा और ब्रेन थैरेपी आजमाएंगे वैज्ञानिक
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अमेरिका के चार नए हथियार
पहला: खून पतला करने वाली दवाईयों से 50 फीसदी तक सुधार
कोरोना से संक्रमित मरीजों के खून को दवाईयों के माध्यम से पतला कर 50 फीसदी तक हालात को सुधारा जा सकता है। वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को अगर ये दवाईयां दे दी जाएं तो उनके बचने की संभावना 130 फीसदी तक बढ़ जाती है। गाढ़े खून को दवा से पतले करने के इलाज को एंटी-कोएगुलेंट ट्रीटमेंट कहते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना से संक्रमित मरीजों में खून के थक्के देखने को मिल रहे हैं। खून के थक्कों का असर पैर की उंगलियों से लेकर दिमाग तक हो रहा है, जिसके वजह से मरीज ब्रेन स्ट्रोक की समस्या से जूझ रहे हैं या उनकी मौत हो जा रही है।
दूसरा: कोरोना को हराने के लिए एजिथ्रोमाइसिन और निमोनिया के कॉम्बिनेशन की दवा
अमेरिकी शोधकर्ता हाल ही में एजिथ्रोमाइसिन और निमोनिया के कॉम्बिनेशन की दवा का ट्रायल कोरोना के मरीजों पर शुरू करने जा रहा है। इस कॉम्बिनेशन में इस्तेमाल होने वाली निमोनिया के दवा का नाम एटोवेक्योन है। यह ट्रायल एरिजोना के ट्रांसलेशनल जिनोमिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में होगा।
तीसरा: वेंटिलेटर से आजादी के लिए ब्रेन थैरेपी
कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ब्रेन थैरेपी को मददगार बताया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक मस्तिष्क के कुछ हिस्से ऐसे होते हैं, जो सांसों और रक्तसंचार को कंट्रोल करते हैं। ऐसे में इन हिस्सों को टारगेट करने वाली थैरेपी का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया जाए तो उन्हें वेंटिलेटर से आजादी मिल सकती है।
चौथा: कोविड-19 का खतरा कम करने के लिए प्रोस्टेट कैंसर थैरेपी
एन्नल्स ऑफ ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक प्रोस्टेट कैंसर थैरेपी ले रहे पुरुषों में कोरोना संक्रमण के मामले बहुत कम देखने को मिल रहे हैं। ऐसे लोगों में अगर कोरोना का संक्रमण हुआ भी है तो हालत अधिक गंभीर नहीं होती।