कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। हर दिन इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों एक शोध अध्ययन में कहा गया था कि वायरस का स्ट्रेन कमजोर हो रहा है और वैक्सीन तैयार करने के लिए यह मुफीद समय है। कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण को लेकर तमाम तरह के उपाय किए जा रहे हैं और अलग तरह के प्रयोगों पर चर्चा भी हो रही है। बीते मार्च से ही इस पर नियंत्रण के लिए 'हर्ड इम्यूनिटी' पर भी चर्चा हो रही थी, लेकिन बहुत सारे विशेषज्ञों ने इसकी सफलता पर आशंका व्यक्त की। हर्ड इम्यूनिटी में महामारी पर नियंत्रण के लिए 60 से 70 फीसदी आबादी के संक्रमित होना जरूरी बताया जाता है। लेकिन एक नए शोध अध्ययन में 10 से 15 फीसदी आबादी का संक्रमित होना भी वायरस पर नियंत्रण के लिए काफी हद तक कारगर बताया जा रहा है।
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15 फीसदी आबादी के संक्रमित होते ही अपनी ताकत खो देगा कोरोना वायरस, इस देश में हुआ ऐसा: शोध
Wed, 15 Jul 2020 09:02 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Wed, 15 Jul 2020 09:02 AM IST
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कोरोना वायरस संक्रमण(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
- अबतक माना जा रहा था कि 60 से 70 फीसदी आबादी संक्रमण की चपेट में आए तो लोगों में हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है। लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक शोध अध्ययन में पाया है कि 10 से 15 फीसदी आबादी भी संक्रमित हो गई तो कोरोना वायरस अपनी ताकत खो देगा। लेकिन क्या वाकई यह वायरस पहले की अपेक्षा कमजोर हो रहा है?
कोरोना वायरस संक्रमण(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
स्वीडन में हुआ ऐसा ही
- इस शोध अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्वीडन का उदाहरण दिया है। कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए जब दुनियाभर के कई सारे देश लॉकडाउन लगा रहे थे, सख्त पाबंदियां लागू की जा रही थी, तब स्वीडन ने वैसा कुछ नहीं किया। वहां दुकानें, रेस्त्रां, बार और बाजार सब खुले रहे। परिणाम यह हुआ कि स्वीडन में कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैला। शुरुआत में बड़ी संख्या में लोगों की मौतें भी हुई। हालांकि, बाद में मौतों की संख्या घटने लगी।
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कोरोना वायरस संक्रमण(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, हाल के दिनों में वहां रोजाना करीब 100 मामले रोज आ रहे हैं और पांच से भी कम लोगों की मौतें हो रही हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, लोगों में इम्यूनिटी विकसित हो गई, इसलिए आंकड़ा घट रहा है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में वायरस कमजोर पड़ जाता है।
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कोरोना वायरस संक्रमण(प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
- शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब स्वीडन में 7.3 फीसदी आबादी तक संक्रमण फैला तो देश में 5,280 मौतें हुई थीं लेकिन 14 फीसदी आबादी तक संक्रमण आते-आते मौतें काफी कम हो गईं। इस आधार पर शोधकर्ताओं को कहना है कि 10 से 15 फीसदी तक संक्रमण फैलने पर वायरस अपनी ताकत खो देता है और उतना जानलेवा नहीं रह जाता है।