वे चिड़चिड़ा रहे थे और डॉक्टरों पर नाराज हो रहे थे क्योंकि हॉस्पिटल में उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में अलग-अलग रखा गया था। आखिर में डॉक्टरों को अस्पताल में दो कमरे मिल गए जो कि एक ग्लास पार्टिशन के जरिए अलग-अलग थे, ऐसे में दोनों लोग एक-दूसरे को देख सकते थे।
Covid 19 Fighter: भारत के सबसे उम्रदराज शख्स की कोरोना पर जीत की कहानी
फादर कहकर बुलाता है अस्पताल का स्टाफ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उम्र के लिहाज से पति इस वायरस से जंग जीतने वाले दुनिया के दूसरा सबसे उम्रदराज शख्स बन गए हैं। दुनिया भर में यह वायरस हजारों लोगों की जिंदगियां लील चुका है।
कोट्टयम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, केरल के रेजीडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. आर पी रेनजिन ने बीबीसी हिंदी से कहा, "इस बीमारी से जीतने वाले सबसे उम्रदराज 93 साल के एक शख्स हैं पिछले 20 दिनों से हम सब उन्हें फादर कहकर बुलाते हैं क्योंकि वे दूसरे सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं।"
एक दिन पहले हुए कोविड-19 के टेस्ट में पिता निगेटिव निकले साथ ही उनकी पत्नी जिन्हें पूरा अस्पताल मदर कहता है वे भी निगेटिव निकले।
तीन हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे
तीन हफ्ते पहले दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों को कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया था। दोनों ही अपनी बेटी और दामाद के संपर्क में आए थे। इन्हें इटली कपल कहा जा रहा है क्योंकि वे चार हफ्ते पहले इटली से वापस लौटे थे।
एक बड़ी टीम को तैनात कर इन्हें ढूंढा गया। इस अभियान की अगुवाई एक वरिष्ठ आईएएस कर रहे थे। यह अभियान इस वजह से चलाया गया क्योंकि वे एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग से बचकर निकल गए थे।
इस उम्रदराज कपल ने इलाज पर कैसी प्रतिक्रिया दी?
डॉक्टर रेनजिन ने कहा, "जब हमने उन्हें ग्लास पार्टिशन वाले आईसीयू कमरों में रखा तो वे खुश थे। एक दफा तो उन्होंने दूध पीने से मना कर दिया। वे केवल अपना उबला हुआ टैपिओका चाहते थे। वह भी केवल अपने खेत का। वह अपने इलाके के मशहूर किसान हैं।"
उनकी इस डिमांड से डॉक्टर आश्चर्यचकित थे। डॉक्टर रेजिन ने कहा, "इसके बाद उनके रिश्तेदार इसे रन्नी में उनके घर से लेकर आए जो कि करीब 60 किमी दूर है। हमें इसकी इजाजत देनी पड़ी क्योंकि ऐसे मामलों में मरीजों को खुश रखना भी जरूरी होता है। हमें उनके निर्देश मानने होते थे।"
एक दफा बिगड़ गई थी फादर की हालत
लेकिन, एक मौके पर पिता की कंडीशन में गिरावट आने लगी और उन्हें वेंटीलेटर पर रखना पड़ा। उनकी हालत में 24 घंटे बाद सुधार आया और उन्हें वेंटीलेटर से हटा लिया गया। इसके बाद डॉक्टरों और नर्सों को उनके बेड से रोके रखने में काफी मुश्किलें आईं।
डॉक्टर रेनजिन ने कहा, "वे हमेशा बेड से उतरकर वॉक करना चाहते थे। मां बैठ जाती थीं और बेड से उतर जाना चाहती थीं। इसका मतलब है कि हमें हमेशा उनके कमरे में एक नर्स रखनी होती थी।"
हॉस्पिटल को एक नर्स और सपोर्ट स्टाफ हर चार घंटे में बदलना पड़ा। इसका मतलब था कि एक दिन में छह नर्सें बदलना।