Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में तमाम तरह की ऐसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं, जो पहले नहीं देखने को मिली थीं। इनमें ब्लड क्लॉटिंग की समस्या भी शामिल है। कोरोना के कई मरीजों में यह समस्या देखने को मिली है और यहां तक कि संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी कई मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग हो रही है। दरअसल, शरीर में खून के एक जगह जम कर इकट्ठा हो जाने को ब्लड क्लॉटिंग कहते हैं। यह शुरुआती स्तर पर तो शरीर को उतना नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन धीर-धीरे यह गंभीर स्थिति में लेकर चला जाता है, जो खतरनाक होता है। इसलिए ब्लड क्लॉटिंग के संकेतों और लक्षणों को समझने की जरूरत है, ताकि समय रहते इससे बचाव किया जा सके। आइए जानते हैं कि इसके लक्षण क्या हो सकते हैं...
कोरोना वायरस: ब्लड क्लॉटिंग के इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है खतरनाक
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पेट में ब्लड क्लॉट
- ब्लड क्लॉटिंग की समस्या पेट में भी हो सकती है। गंभीर पेट दर्द और सूजन इसके संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये समस्याएं फूड प्वॉयजनिंग की वजह से भी हो सकती हैं, लेकिन इन लक्षणों को नजरअंदाज भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
मस्तिष्क में ब्लड क्लॉट
- ब्लड क्लॉटिंग मस्तिष्क में भी हो सकती है। अचानक से तेज सिर दर्द होना इसके लक्षणों में शामिल है। साथ ही अचानक से बोलने या देखने में हो रही समस्या को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह भी दिमाग में खून के थक्के जमने का संकेत हो सकता है।
हाथ-पैर में ब्लड क्लॉट
- हाथों या पैरों में भी ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है। सूजन, दर्द और ऐंठन इसके संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा त्वचा का रंग गहरा लाल या नीला पड़ जाए तो यह भी ब्लड क्लॉट का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें, बल्कि इसको लेकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित सलाह लें।
दिल में ब्लड क्लॉट
- खून के थक्के जमने की समस्या दिल में भी हो सकती है, लेकिन यह गंभीर परेशानी की वजह बन सकता है। इसके कारण व्यक्ति को हार्ट अटैक आ सकता है। सांस लेने में दिक्कत होना, धड़कन तेज होना और सोने पर सांस लेने की तेज आवाज आना इसके लक्षण हो सकते हैं।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।