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कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों को जकड़ रहा 'गुलियन बेरी सिंड्रोम', यहां 10 लोग हुए लकवाग्रस्त

Thu, 24 Dec 2020 04:14 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 24 Dec 2020 04:14 PM IST
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coronavirus problems after recovery post covid guillain barri syndrome
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दुनियाभर में अब तक सात करोड़ 91 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि इस वायरस की वजह से 17 लाख 38 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत में भी इसके संक्रमण के मामले एक करोड़ एक लाख से ऊपर हो चुके हैं। वहीं, एक लाख 46 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। एक तो दुनियाभर में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और ऊपर से इसके संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए नई मुसीबतें भी पैदा हो रही हैं। अब खबर आ रही है कि गुजरात के अहमदाबाद में पिछले एक हफ्ते में अब तक 10 ऐसे मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' के लक्षण पाए गए हैं। इस विकार की वजह से ये सभी मरीज लकवाग्रस्त हो गए हैं। 

coronavirus problems after recovery post covid guillain barri syndrome
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉ. जेपी मोदी ने बताया कि 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' से पीड़ित 10 ऐसे मरीज सिविल अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं, जो पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे और फिर बाद में ठीक हो गए। 

coronavirus problems after recovery post covid guillain barri syndrome
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या है 'गुलियन बेरी सिंड्रोम'? 

यह एक दुर्लभ, लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून (स्व-प्रतिरक्षित) विकार है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिका तंत्र में मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है। यह बीमारी वायरस के संक्रमण से होती है, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह संक्रमित मरीज से किसी दूसरे में या फ्लू की तरह हवा में वायरस की सक्रियता से नहीं फैलता। 

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coronavirus problems after recovery post covid guillain barri syndrome
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'गुलियन बेरी सिंड्रोम' से किसे ज्यादा खतरा? 

विशेषज्ञ बताते हैं कि 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' वैसे तो एक लाख लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होता है, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को गुलियन बेरी सिंड्रोम होने का खतरा ज्यादा होता है। इसका इलाज प्लाज्मा फोरेसिस मशीन से प्लाज्मा के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन समय रहते इसका समुचित इलाज न होने पर मरीज की जान जाने का खतरा रहता है। 

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coronavirus problems after recovery post covid guillain barri syndrome
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

इस बीमारी की वजह से शुरुआत में हाथों और पैरों में कमजोरी महसूस होती है और धीरे-धीरे कमर और कंधों पर भी उसका असर पहुंच जाता है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। मरीज को पांच-छह दिन तक रोज एक इंट्राविनस इम्यूनोग्लोबिलिन इंजेक्शन लगाए जाते हैं, लेकिन यह इंजेक्शन बहुत ही महंगा होता है। 

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