कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दुनियाभर में अब तक सात करोड़ 91 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि इस वायरस की वजह से 17 लाख 38 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत में भी इसके संक्रमण के मामले एक करोड़ एक लाख से ऊपर हो चुके हैं। वहीं, एक लाख 46 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। एक तो दुनियाभर में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और ऊपर से इसके संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए नई मुसीबतें भी पैदा हो रही हैं। अब खबर आ रही है कि गुजरात के अहमदाबाद में पिछले एक हफ्ते में अब तक 10 ऐसे मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' के लक्षण पाए गए हैं। इस विकार की वजह से ये सभी मरीज लकवाग्रस्त हो गए हैं।
कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों को जकड़ रहा 'गुलियन बेरी सिंड्रोम', यहां 10 लोग हुए लकवाग्रस्त
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉ. जेपी मोदी ने बताया कि 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' से पीड़ित 10 ऐसे मरीज सिविल अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं, जो पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे और फिर बाद में ठीक हो गए।
क्या है 'गुलियन बेरी सिंड्रोम'?
यह एक दुर्लभ, लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून (स्व-प्रतिरक्षित) विकार है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिका तंत्र में मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है। यह बीमारी वायरस के संक्रमण से होती है, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह संक्रमित मरीज से किसी दूसरे में या फ्लू की तरह हवा में वायरस की सक्रियता से नहीं फैलता।
'गुलियन बेरी सिंड्रोम' से किसे ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' वैसे तो एक लाख लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होता है, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को गुलियन बेरी सिंड्रोम होने का खतरा ज्यादा होता है। इसका इलाज प्लाज्मा फोरेसिस मशीन से प्लाज्मा के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन समय रहते इसका समुचित इलाज न होने पर मरीज की जान जाने का खतरा रहता है।
इस बीमारी की वजह से शुरुआत में हाथों और पैरों में कमजोरी महसूस होती है और धीरे-धीरे कमर और कंधों पर भी उसका असर पहुंच जाता है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। मरीज को पांच-छह दिन तक रोज एक इंट्राविनस इम्यूनोग्लोबिलिन इंजेक्शन लगाए जाते हैं, लेकिन यह इंजेक्शन बहुत ही महंगा होता है।