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Coronavirus: कोरोना के नए स्ट्रेन के खिलाफ कम प्रभावी हो सकते हैं एंटीबॉडी और टीके, शोध में दावा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 07 Mar 2021 11:31 AM IST
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कोरोना वैक्सीन
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दुनियाभर में अब तक 11 करोड़ 70 लाख से भी अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 26 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस के नए-नए वैरिएंट्स ने तो चिंताएं और भी बढ़ा दी हैं। अब एक नए अध्ययन के मुताबिक, व्यापक रूप से फैल रहे कोरोना के नए वैरिएंट्स पर कोविड-19 एंटीबॉडी आधारित दवाएं और अब तक विकसित टीके कम प्रभावी हो सकते हैं। नेचर मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना वायरस के तीन तेजी से फैलने वाले वैरिएंट्स, जो दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और ब्राजील में पहली बार मिले थे, उस एंटीबॉडी से बच सकते हैं जो वायरस के मूल रूप के खिलाफ काम करता है, जिसने महामारी को जन्म दिया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अमेरिका के सेंट लुईस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं समेत कई वैज्ञानिकों के मुताबिक, चीन के वुहान से आए मूल वायरस की तुलना में कोरोना के नए वैरिएंट को बेअसर करने के लिए टीकाकरण या संक्रमण के बाद बनी एंटीबॉडी या दवा के रूप में इस्तेमाल के लिए तैयार किए गए शुद्ध एंटीबॉडी की जरूरत होती है।
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अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के माइकल एस. डायमंड ने कहा, 'हमें चिंता है कि जिन लोगों में हमें एंटीबॉडी का एक सुरक्षात्मक स्तर होने की उम्मीद है, क्योंकि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे या उन्हें इसके खिलाफ टीका लगाया गया है, उन्हें भी नए वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा मिल सकती है।'
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शोधकर्ताओं ने कहा कि टीकाकरण या प्राकृतिक संक्रमण से एक व्यक्ति कितना एंटीबॉडी पैदा करता है, इसमें व्यापक भिन्नता है। माइकल एस. डायमंड ने कहा, ' कुछ लोगों में एंटीबॉडी निर्माण का स्तर बेहद उच्च होता है और ऐसे लोग वायरस के नए वैरिएंट से अधिक सुरक्षित हो सकते हैं। लेकिन कुछ लोग, खासकर बुजुर्ग और टीका नहीं लेने वाले लोगों में हो सकता है कि एंटीबॉडी उच्च स्तर में नहीं बन सकता है।'
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माइकल एस. डायमंड ने कहा, 'यदि सुरक्षा के लिए आवश्यक एंटीबॉडी का स्तर 10 गुना बढ़ जाता है, जैसा कि हमारे डेटा से संकेत मिलता है, वे भी पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि जिन लोगों को कोरोना से सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनमें से कम से कम एंटीबॉडी के होने की संभावना है।'
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