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इस देश में कोरोना एंटीबॉडीज का अनोखा मामला आया सामने, वैज्ञानिक भी रह गए हैरान

Sun, 22 Nov 2020 07:02 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 22 Nov 2020 07:02 PM IST
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Coronavirus new study in australia finds that Children can develop antibodies without being infected with covid 19
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना की एंटीबॉडीज को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चा चल रही है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी लगभग छह महीने तक रहती है जबकि कुछ अध्ययन बताते हैं कि चार महीने में ही एंटीबॉडीज खत्म हो जाती हैं। अब ऑस्ट्रेलिया में एंटीबॉडीज को लेकर एक अनोखा मामला देखने को मिला है। यहां एक ही परिवार के तीन बच्चों में कोरोना की एंटीबॉडीज मिली हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब बच्चों के लार के नमूनों की जांच की गई तो उनके शरीर में एंटीबॉडीज मिलने की पुष्टि हुई। 

Coronavirus new study in australia finds that Children can develop antibodies without being infected with covid 19
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों के माता-पिता कोरोना से संक्रमित हुए थे और उनमें लक्षण भी दिखे थे। इस दौरान बच्चे उनके साथ ही रहे। दो बच्चों में तो कोरोना के हल्के लक्षण दिखे, लेकिन तीसरे और सबसे छोटे वाले बच्चे में कोई भी लक्षण नहीं दिखे, पर एंटीबॉडीज बन गईं। मर्डोक चिल्ड्रेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज का मिलना इस बात का सबूत है कि वो कभी न कभी कोरोना से संक्रमित हुआ है और उसी के बाद उसके शरीर में एंटीबॉडीज बनीं। 

Coronavirus new study in australia finds that Children can develop antibodies without being infected with covid 19
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में यह देखने को मिला है कि बच्चों में बड़ों की तरह कोरोना के लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन वो संक्रमित हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के इस मामले को दुर्लभ मामला माना जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि अलग-अलग उम्र के लोगों में कोरोना के खिलाफ अलग-अलग इम्यून रेस्पॉन्स हो सकता है। 

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Coronavirus new study in australia finds that Children can develop antibodies without being infected with covid 19
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हमेशा के लिए नहीं विकसित होती इम्यूनिटी 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद हमेशा के लिए इम्यूनिटी नहीं विकसित होती। हालांकि किसी में ज्यादा दिन के लिए होती है तो किसी में कम। भारत में तो कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि विकसित देशों में लोगों के पास जीवन-यापन की सुख-सुविधाएं ज्यादा होती हैं जबकि विकासशील देशों में इनके मुकाबले काफी कम होती हैं। इस वजह से विकासशील देशों में लोगों का सामना अलग-अलग तरह के वायरस से लगातार होता रहता है। इसके कारण उनके शरीर में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा हो जाती है। 

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Coronavirus new study in australia finds that Children can develop antibodies without being infected with covid 19
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

शरीर में कितने दिन तक रहती है एंटीबॉडीज 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के शरीर में मौजूद कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज का 90 फीसदी हिस्सा महज 28 दिनों के अंदर ही खत्म हो जाता है जबकि 93 फीसदी तक कोरोना एंटीबॉडीज 28 से 40 दिन के अंदर खत्म हो जाती हैं। ऐसे में व्यक्ति के दोबारा संक्रमित होने की संभावना रहती है। कोरोना से दोबारा संक्रमण के कई मामला हाल में देखने को भी मिले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि दोबारा संक्रमण पहले वाले से ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि सतर्क रहें और अपनी सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें। 

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