देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने पिछले कई दिनों से परेशान करके रखा हुआ है। इस लहर में ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं और यहां तक कि काफी अधिक संख्या में लोगों की मौत भी हो रही है। हालांकि इस दौरान संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मन में कई तरह के सवाल उठते हैं, जैसे- कोरोना से ठीक होने के बाद अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य संक्रमित मरीज से मिलता है, तो क्या उसके फिर से संक्रमित की संभावना है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं ऐसे ही कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
{"_id":"60a7935376dd1e132e0f5a00","slug":"coronavirus-in-india-update-covid-19-second-wave-coronavirus-question-answer","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"विशेषज्ञ से जानें: कोरोना से ठीक होने के बाद क्या संक्रमित मरीज से मिलना खतरनाक है?","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
विशेषज्ञ से जानें: कोरोना से ठीक होने के बाद क्या संक्रमित मरीज से मिलना खतरनाक है?
Fri, 21 May 2021 06:03 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 21 May 2021 06:03 PM IST
विज्ञापन
कोरोना वायरस
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
पहली लहर की तुलना में इस दूसरी लहर में क्या अंतर है?
- दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर हमारे लिए काफी मुसीबतों को लेकर आई है। पहली लहर की तुलना में इस बार कम समय में बहुत ज्यादा संख्या में केस आए और कुछ हद तक सिस्टम ओवरबर्डन (अधिक बोझ) होने लगा। लेकिन समय रहते अब हम संभल रहे हैं और उम्मीद है कि काले बादल छटेंगे। इसके लिए जरूरी है कि किसी भी तरह की चूक न हो। केस कम भी हों, तो भी सिर्फ अगली लहर तक ही नहीं बल्कि आने वाले कई महीनों और साल तक नियमों का पालन करें।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कोरोना से ठीक होने के बाद अगर किसी अन्य संक्रमित से मिलते हैं, तो क्या फिर संक्रमण की संभावना है?
- डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति में एंटीबॉडीज बनती हैं, जो उन्हें लंबे समय तक सुरक्षा देती है। लेकिन कई केस ऐसे भी आए हैं, जिनमें लोग संक्रमित हुए हैं। इसलिए कोरोना हुआ हो या नहीं, वैक्सीन लगवाई हो या नहीं, हर हाल में कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर (कोरोना से बचने के उपाय) का पालन करना है।'
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कई लोगों को कोरोना के हल्के संक्रमण होते हैं तो क्या उन्हें भी 3 महीने बाद ही वैक्सीन लगवानी है?
- डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'कोविड नई बीमारी है, इस समय जो भी शोध सामने आते हैं, उसके लिहाज से इलाज और बचाव के तरीके अपडेट किए जाते हैं। पहले मानते थे कि जिन लोगों को कोविड संक्रमण हो गया है, तो शरीर वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है और वो कुछ समय तक रहती हैं। ये एंटीबॉडी तीन से छह महीने तक रहती हैं और तब तक वायरस से लड़ने में मदद करती हैं। हालांकि एंटीबॉडीज कितनी मात्रा में बन रही हैं, वो उनके शरीर पर निर्भर करता है। इसके कई फायदे हैं, पहले तो नेचुरल (प्राकृतिक) इम्यूनिटी आपको बचाएगी, उसके बाद इम्यूनिटी जैसे ही कम होगी और तीन महीने हो जाएंगे तो एक बार फिर आपको वैक्सीन के रूप में इम्यूनिटी मिलने लगेगी।'
विज्ञापन
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
ब्लैक फंगस को लेकर लोगों में काफी भय है, इसे कैसे समझें?
- डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'जी हां, आज के समय में ब्लैक फंगस के भी कई केस आ रहे हैं। पहले इसके कभी-कभी एक या दो केस ही सामने आते थे। लेकिन इसके नाम से घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क और सावधान रहें। ये उन कोविड संक्रमित लोगों को होता है, जिन्हें कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारी हो या कोविड से संक्रमण के बाद लंबे समय तक ऑक्सीजन, स्टेरॉयड की खुराक ली हो। ऐसे लोग जिन्हें हल्का संक्रमण हुआ है या स्टेरॉयड का सेवन नहीं किया, उनमें इसका जोखिम नहीं है। अगर सजगता की बात है, तो कोविड से ठीक होने के बाद साइनस में कोई संक्रमण लगता है, आंख में दर्द या रोशनी कम हो रही है, चेहरे के किसी भाग पर सूजन हो रही है, सिर में एक तरफ दर्द हो रहा है, तो तुरंत आंख, नाक, गले के डॉक्टर को दिखाएं।'