कोरोना वायरस फेफड़ों पर हमला कर उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है, ये तो हम अब जान ही गए हैं, लेकिन ये वायरस सिर्फ फेफड़े ही नहीं बल्कि दिल के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रहा है। भारत में लाखों लोग हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं और ऐसे में उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, जिससे उन्हें बच कर रहने की सलाह दी जा रही है। अभी बहुत सारे ऐसे मरीज होंगे, जिनकी हार्ट की सर्जरी होनी थी, लेकिन कोरोना की वजह से उन्हें रोक दिया गया। ऐसे में उन्हें किस तरह की सावधानी बरतने की जरूरत है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और हृदय संबंधी ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ ने चेताया: बुखार से भी बढ़ जाता है हार्ट रेट, कोरोना मरीज रहें सावधान
Mon, 31 May 2021 12:47 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 31 May 2021 12:47 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
जिनकी हार्ट आदि की सर्जरी रुक गई है, उन्हें क्या सलाह है?
- दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. मनोज कुमार कहते हैं, 'इस वक्त जिस तरह का माहौल है, उसमें नॉन कोविड मरीज साइडलाइन हो गए हैं। लेकिन अगर कुछ समस्या लगती है तो अपने डॉक्टर से टेली कंसल्टेंसी कर लें। इससे आपको पता चलेगा कि जब तक सर्जरी या ट्रांसप्लांट न हो जाए, तब तक क्या करना है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ऐसे मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है, अगर किसी को दर्द महसूस हो रहा है और सर्जरी जरूरी है तो आप डॉक्टर से संपर्क करके जा सकते हैं। अस्पतालों में नॉन कोविड मरीजों की इमरजेंसी के लिए भी बेड रखे गए हैं।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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पल्स ऑक्सीमीटर में पल्स रेट 100 से भी ज्यादा पहुंचती है, इसे कैसे समझें?
- डॉ. मनोज कुमार कहते हैं, 'सामान्य हार्ट रेट 60-90 होता है। 60 से नीचे होता है तो उसे स्लो हार्ट रेट और 90 से ऊपर है तो फास्ट हार्ट रेट कहते हैं। अब जो कोविड मरीज होते हैं, उनमें अगर बुखार है तो उससे भी हार्ट रेट बढ़ जाता है। ऑक्सीजन सेचुरेशन कम है तो कई बार वो भी बढ़ जाता है। अगर थोड़ा बढ़ता है तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है। हार्ट रेट किस तरह का बढ़ा है, वो भी महत्वपूर्ण है, जैसे वेंट्रिकुलर टेककार्डिया में काफी तेजी से बढ़ने लगता है, उसमें 100 नहीं बल्कि 170-180 तक पहुंचने लगता है। इसलिए अगर किसी का हार्ट रेट 120 से ज्यादा है तो ईसीजी करा सकते हैं, इससे पता चलेगा कि इसका क्या कारण है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोरोना काल में हार्ट डिजीज (दिल की बीमारी) के मरीज अपना कैसे ध्यान रखें?
- डॉ. मनोज कुमार कहते हैं, 'सबसे पहले ये जान लें कि अगर कोरोना से पहले ही किसी को दिल की बीमारी, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या स्ट्रोक कार्डियोवस्कुलर आदि है तो ऐसे लोगों में मृत्यु दर ज्यादा पाई गई है। कार्डियोवस्कुलर डिजीज (बीमारी) में अमेरिका का एक 14 हजार मरीजों का डाटा है, जिसमें देखा गया है कि करीब 26 से 38 प्रतिशत अस्पताल में भर्ती मरीजों की मृत्यु दर थी। ऐसे में जिन लोगों में इस तरह की बीमारी है, उनमें कोविड-19 का रिस्क ज्यादा है और मृत्यु दर की संभावना भी रहती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें ही कोरोना हो। सिर्फ ध्यान रखें, अपनी दवाओं को बंद न करें। घर में किसी को या कोई भी लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से संपर्क बना कर रखें। खानपान का भी ध्यान रखना है। अभी कई राज्यों में लॉकडाउन है तो घर में भी एक्टिव रहें, योग, एक्सरसाइज करते रहें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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देश में कोविड की वर्तमान स्थिति को कैसे देखते हैं?
- डॉ. मनोज कुमार कहते हैं, 'जिस तरह से कुछ महीने पहले दूसरी लहर में नए केस सुनामी की तरह आ गए थे, एक समय केस चार लाख से ऊपर पहुंच गए थे, लेकिन अब थोड़ी राहत है। आज एक लाख 65 हजार के आसपास केस आए हैं। एक्टिव (सक्रिय) केस की संख्या भी घटकर 21 लाख के आसपास है, रिकवरी रेट भी 91 प्रतिशत के ऊपर हो गए हैं। फिर भी ये समझना जरूरी है कि खतरा अभी टला नहीं है। इसके अलावा ये भी ध्यान देना है कि भारत बड़ा देश है और अलग-अलग राज्यों में उनके पीक का समय और केस की संख्या बढ़ने-घटने का आंकड़ा अलग-अलग है। अभी भी कुछ राज्यों में केस एक हजार से नीचे हैं तो कुछ राज्यों, जिलों और शहरों में केस भी बढ़ कर आ रहे हैं। इसलिए केस अभी कम हो रहे हैं, लेकिन ये रूप बदल कर वार कर सकता है, जिससे बचने के लिए मास्क लगाना बहुत जरूरी है।'