देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले अब धीरे-धीरे कम होने लगे हैं। आंकड़ा अब तीन लाख के नीचे आ गया है। वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, बीते 24 घंटे में दो लाख 81 हजार नए केस सामने आए हैं। हालांकि मौतों का आंकड़ा अभी भी घट नहीं रहा है। पिछले 24 घंटे में चार हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है। इस बीच तेजी से फैल रही ब्लैक फंगस की बीमारी ने भी काफी चिंताएं पैदा कर दी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि आखिर ब्लैक फंगस की बीमारी कोरोना संक्रमण के समय ही क्यों हो रही है, साथ ही कोरोना से जुड़े अन्य जरूरी सवालों के जवाब भी...
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विशेषज्ञ से जानें: ब्लैक फंगस की बीमारी कोरोना संक्रमण के समय ही क्यों हो रही है?
Mon, 17 May 2021 10:16 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 17 May 2021 10:16 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोविड से रिकवर हुए काफी समय हो गया, लेकिन खांसी आ रही है तो क्या करें?
- दिल्ली स्थित जी. बी. पंत अस्पताल के डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'इस समय कई लोगों में पोस्ट कोविड में खांसी आ रही है। अगर बुखार या कोई और लक्षण नहीं है, तो परेशान न हों। कई लोगों को दो महीने तक खांसी आती है, लेकिन धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं। अगर खांसी तेज है या बलगम के साथ ब्लड आ रहा है तो अपने डॉक्टर को दिखा सकते हैं।'
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क्या नए वैरिएंट्स लोगों को दोबारा संक्रमित कर सकते हैं?
- डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'इस बारे में अलग-अलग देशों में कई शोध आए हैं। उन शोध के मुताबिक, जब तक एंटीबॉडीज रहती हैं, तब तक व्यक्ति को कोरोना का संक्रमण दोबारा नहीं होता या कह सकते हैं कि उनमें लक्षण ही नहीं आते यानी वायरस कमजोर हो जाता है, क्योंकि एंटीबॉडी उन्हें बचाती है। लेकिन शरीर में एंटीबॉडीज कितने दिन तक रहती हैं, इसके बारे में भी अलग-अलग रिसर्च हैं, कोई तीन महीने तक तो कई छह या आठ महीने तक कहते हैं। मगर इस बात का ध्यान रखना है कि वायरस कितना भी रूप बदले या कोई भी वैरिएंट आए, उससे बचाव का उपाय कोविड नियमों का पालन है।'
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ब्लैक फंगस की बीमारी कोरोना संक्रमण के समय ही क्यों हो रही है?
- डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'ब्लैक फंगस हमारे वातावरण में पहले से मौजूद है, लेकिन इस वक्त कोविड काल में म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी की तरह लोगों में पाई जा रही है। इसकी वजह ये है कि कोविड के इलाज में, जो दवा दी जा रही है, जैसे डेक्सामेथासोन और स्टेरॉयड, उनसे इम्यूनिटी कम होती है। खासतौर पर डायबिटीज वाले मरीजों में इसका ज्यादा असर होता है या फिर ऐसे लोग जिन्हें वेंटिलेटर पर रखते हैं, उनमें ये पाया गया है। इसलिए कहा जाता है कि खुद से स्टेरॉयड या कोई भी दवा का प्रयोग ना करें। डॉक्टर की निगरानी में ही दवा लें।'
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ब्लैक फंगस से खुद को कैसे बचाएं?
- डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'अगर किसी को डायबिटीज है और कोरोना हो गया है, तो ब्लड शुगर पर ध्यान दें। जब भी कोरोना का उपचार करें या घर पर रहकर इलाज कर रहे हैं तो स्टेरॉयड की जरूरत नहीं है और अगर ले रहे हैं तो डॉक्टर की निगरानी में ही लें।'