देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। कुछ राज्यों में संक्रमण के मामले काफी कम हैं तो कुछ राज्यों में बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। हालांकि राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत देश में अब तक 58 करोड़ 25 लाख टीके लगाए जा चुके हैं। वहीं, इस महामारी से अब तक तीन करोड़ 16 लाख से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं, लेकिन इस बीच पोस्ट कोविड की समस्या भी काफी गंभीर हो गई है। पोस्ट कोविड यानी कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों को तरह-तरह की समस्याएं हो रही हैं, जिसमें कमजोरी, थकान, अवसाद, बाल झड़ना, नींद से जुड़ी परेशानियां, सांस लेने में दिक्कत आदि शामिल हैं। इसके अलावा पोस्ट कोविड में कई लोगों में वजन कम होने की समस्या भी देखी जा रही है। ऐसे में क्या करना चाहिए? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ से जानें: पोस्ट कोविड में वजन कम होने की समस्या हो गई है तो क्या करना चाहिए?
Mon, 23 Aug 2021 03:10 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Mon, 23 Aug 2021 03:10 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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परिवार के सभी सदस्यों को टीका लग चुका है, क्या अब बच्चों को भी टीका लगवाने की जरूरत है?
- दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'देश में बच्चों के लिए जायकोव-डी वैक्सीन बनी है। जाइडस कैडिला की वैक्सीन डीएनए वैक्सीन है, यह आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत बड़ा कदम है। हमने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन बनाई है। करीब 66 प्रतिशत लोगों पर यह इफेक्टिव (प्रभावी) है। यह काफी सस्ती है और इसके लिए किसी स्पेशल टेम्परेचर (विशेष तापमान) की जरूरत नहीं है, इसे नॉर्मल फ्रिज में 2-8 डिग्री में रखा जा सकता है। सीरो सर्वे में पाया गया है कि बच्चों में भी संक्रमण होता है। फेफड़ों में रिसेप्टर कम होने की वजह से बच्चों में लंग कॉम्प्लिकेशन कम होते हैं। उनको नॉर्मल खांसी-जुकाम ही होता है। अगर उन्हें वैक्सीनेट कर दिया जाएगा तो और आसानी हो जाएगी।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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पोस्ट कोविड में अगर वेट लॉस हो गया है, तो ऐसे में क्या करना चाहिए?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'इसके कई फैक्टर हो सकते हैं, जैसे उन्होंने जो दवाइयां खाईं हैं, उससे उन्हें भूख नहीं लगती हो, कभी-कभी एसिडिटी से भी हो जाती है। या अगर कभी किसी को कोई कह देता है कि ये एलोपैथी की दवाई खा लो, तो वह खा लेते हैं। लेकिन इतनी सारी दवाइयों का सेवन ठीक नहीं है। इसके लिए नॉर्मल खाना खाइए। हां, अगर एपेटाइट कम है, तो हम हमेशा देखें कि इसे कैसे बढ़ाया जाए। 99 प्रतिशत यह मल्टीपल ड्रग्स के कारण होता है। कई बार जब ड्रग्स लेना छोड़ देते हैं, तो उनकी एपेटाइट ठीक हो जाती है। ऐसे में सिर्फ हेल्दी डाइट लेनी चाहिए। इसके लिए कोई स्पेशल डाइट की जरूरत नहीं है। हाई प्रोटीन डाइट खाने से आपका वेट जल्दी बढ़ सकता है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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वैक्सीनेशन लगातार हो रही है, लेकिन फिर भी कोरोना के केस का आंकड़ा कम-ज्यादा क्यों हो रहा है?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'पहले जब पैंडेमिक हुआ था, तब एक-एक दिन में लाखों केस आ रहे थे। अब 40-50 हजार केस आ रहे हैं। वायरस एक जगह से दूसरी जगह मूव करता है। अगर केरल और एक दो राज्यों को और छोड़ दें, तो वायरस की संख्या बेहद कम है। इसका कारण वैक्सीनेशन भी है। वैक्सीन लगवाने से बीमारी तो हो सकती है, लेकिन सीवियर डिजीज (गंभीर बीमारी) नहीं होती।'
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बेघर लोगों के लिए सरकार द्वारा वैक्सीनेशन को लेकर क्या व्यवस्था की गई है?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'जितने भी सरकारी अस्पताल हैं, उनमें वैक्सीन की व्यवस्था है। इनमें वैक्सीन फ्री है, आप चाहें गरीब हों या अमीर हों, वैक्सीन लगवा सकते हैं। बात बस जागरूकता की है। हो सकता है सरकारी अस्पताल में प्राइवेट अस्पताल से थोड़ा ज्यादा समय लगे, लेकिन आपको वहां वैक्सीन मिल जाएगी।'