कोरोना वायरस संक्रमण से दुनिया पिछले 10 महीने से ज्यादा समय से जूझ रही है। मौसम में बदलाव के साथ ही मौसमी बीमारियों का भी खतरा बढ़ा है। मच्छरजनित बीमारियां डेंगू, मलेरिया और चिकुनगुनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं, जबकि वायरल फ्लू या इन्फ्लूएंजा(H1N1) जैसी बीमारियों का बढ़ना भी इस कोरोना काल में ज्यादा खतरनाक है। कोरोना के साथ इन बीमारियों के उपचार का प्रोटोकॉल (Treatment Protocol) नहीं होने से चिकित्सक भी चिंतित थे। अब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना के साथ इन बीमारियों के सह-संक्रमण(Co-infectio) के खतरे को देखते हुए उपचार और सावधानियों के दिशानिर्देश जारी किए हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि ये बीमारियां न सिर्फ कोविड डायग्नोसिस के लिए क्लीनिकल चुनौतियां पेश करती हैं, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर दोहरा असर पड़ता है। कारण कि इन बीमारियों के लक्षण भी कोरोना से मिलते हैं, जो संशय पैदा करते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देश के मुताबिक, मॉनसून से पहले और बाद में, इन बीमारियों के लिए एक ‘उच्च संदेह सूचकांक’ बनाया जाना चाहिए ताकि समय पर बीमारियों की पहचान हो सके और संभावित कदम उठाए जा सकें।
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दिशानिर्देश में कहा गया है कि ‘सतर्कता व चौकसी, उच्च संदेह सूचकांक और सह-संक्रमण की संभावना के बारे में जागरूकता से चिकित्सकों को सह-संक्रमण के मामलों के खतरनाक परिणामों को रोकने और क्लीनिकल नतीजों को सुधारने में सहायता मिलेगी। इसके लिए कोरोना वायरस की जांच प्रक्रिया तो वही रहेगी, लेकिन संदेह होने पर संभावित सह-संक्रमण के लिए अलग से जांच करानी होगी।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, सह-संक्रमण के मामलों में, क्रॉस रिएक्शंस हो सकते हैं। यानी गलत निगेटिव या पॉजिटिव रिपोर्ट आ सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन में ऐसी बीमारियों के मामले में संभावित सह-संक्रमणों के लिए अलग से भी जांच कराने की सलाह दी गई है। इनमें वे तमाम जांच शामिल हैं, जिन्हें आईसीएमआर ने कोविड के लिए, नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम ने डेंगू, मलेरिया और चिकुनगुनिया के लिए और साथ ही एनसीडीसी ने मौसमी इन्फ्लुएंजा, लेप्टोस्पाइरोसिस के लिए निर्धारित किया है।
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Coronavirus Test kit
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि आईसीएमआर और मंत्रालय द्वारा जारी कोरोना वायरस के टेस्टिंग प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। हालांकि यह भी कहा है कि प्रोटोकॉल के अलावा जब भी सह-संक्रमण का संदेह होगा, अन्य जरूरी जांच भी किए जाने चाहिए। दिशानिर्देश में कोरोना के इलाज की तमाम सुविधाओं की तरह मलेरिया, डेंगू और स्क्रब टाइफस के लिए, रैपिड डायग्नोस्टिक किट्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।