कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। दुनिया के 200 से ज्यादा देश इस वायरस की चपेट में हैं। हर दिन इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। वैज्ञानिक एक ओर जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन बनाने में लगे हैं तो दूसरी ओर इसकी दवा को लेकर भी शोध हो रहे हैं। फिलहाल पहले से उपलब्ध दवाओं के जरिए कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है। कोरोना का इलाज ढूंढने की कड़ी में स्पेन के शोधकर्ताओं ने छह हजार से ज्यादा दवाओं का विश्लेषण कर ऐसे दवाओं की पहचान की है, जो इलाज में मददगार होगी। शोधकर्ताओं ने इस विशेष रिसर्च प्रोग्राम को कोविड मूनशॉट नाम दिया गया है।
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Coronavirus Medicine: 6466 दवाओं पर अध्ययन के बाद दावा, कोरोना के इलाज में कारगर होंगी ये दो दवाएं
Sat, 30 May 2020 02:23 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 30 May 2020 02:23 PM IST
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कोरोना वायरस की दवा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pexels
कोरोना वायरस की दवा(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : social media
कंप्यूटर तकनीक की मदद
- स्पेन की रोविरा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर तकनीक की मदद से 6466 दवाओं का विश्लेषण कर दो दवाओं की पहचान की है। ये दोनो ड्रग्स संक्रमण के बाद रेप्लिकेशन यानी कोरोना को उसकी संख्या बढ़ाने से रोकेंगे।
दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
एंजाइम पर लगाम
- स्पेन की रोविरा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दोनों दवा कोरोना के उस एंजाइम पर लगाम लगाएंगी, जिसके जरिए वायरस अपनी संख्या को बढ़ाता है। मालूम हो कि वायरस की संख्या बढ़ने के कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ बढ़ती जाती है और उसे वेंटिलेटर की जरूरत होती है।
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दवा(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
कारप्रोफेन और सेलेकॉग्सिब
- स्पेन के शोधकर्ताओं का यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलीक्युलर साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक कारप्रोफेन और सेलेकॉग्सिब एंटी-इंफ्लेमेट्री ड्रग हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल इंसान पर और दूसरे का इस्तेमाल जानवरों के लिए किया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है इस शोध के परिणाम कोरोना की वैक्सीन तैयार करने में भी मददगार साबित होंगे।
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कोरोना वायरस की दवा(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
कैसे काम करती है दवा
- कोरोना वायरस में एम-प्रो नाम का एंजाइम पाया जाता है। यह एंजाइम ऐसा प्रोटीन बनाता है, जिसकी इसकी मदद से कोरोना वायरस शरीर में अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर देता है और लगातार बढ़ता जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये दवाएं इसी एंजाइम को रोकती है।