कोरोना से जूझते हुए पूरे विश्व को लगभग एक वर्ष हो चुका है। इसे मात देने के लिए हर देश अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया भी त्वरित हो चुकी है। वर्तमान में विश्व में 212 वैक्सीन पर काम चल रहा है। संभावना है कि इनमें से 10 वैक्सीन अगले साल तक लोगों तक पहुंच जाएं। बाकी शेष सभी वैक्सीन 2024 तक लोगों की पहुंच में होंगी। ड्यूक विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक आने वाले तीन से चार साल में दुनिया के सभी लोगों को वैक्सीन लग जाएगी। भविष्य में वैक्सीन के लिए निवेश और उत्पादन क्षमता पर भी काम किया जाएगा।
कोरोना वैक्सीन: अधिकतम 28 दिन की अवधि में भारत बायोटेक के लगेंगे दो डोज, अन्य 8 वैक्सीन के भी लगेंगे दो डोज
वैक्सीन के दो डोज में रहेगा इतने दिन का अंतर
फिलहाल दुनिया में 10 वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। इनमें से नौ वैक्सीन ऐसी हैं जिनके दो डोज लगवाने होंगे। जिसमें चीन की सिनोवैक के दो डोज के बीच 14 दिन का अंतर है तो बैल्जियम की जॉनसन एंड जॉनसन के दो डोज के बीच 56 दिन तक का अंतर हो सकता है। अन्य 7 वैक्सीन के दो डोज की अधिकतम अवधि में भी अंतर है।
चीन की कैनसिनो, बीआईबी का एक ही डोज लगेगा
अमेरिका की मॉडेर्ना, भारत की भारत बायोटेक, अमेरिका की फाइजर-बायोएनटेक के दो डोज में 28 दिन तक का अधिकतम अंतर रह सकता है। अमेरिका की नोवावैक्स, रशिया की स्पूतनिक-5, चीन की वुहान सिनोफार्म के दो डोज में अधिकतम 21 दिन का अंतर हो सकता है। चीन की कैनसिनो, बीआईबी का एक ही डोज पर्याप्त होगा।
गरीब देशों में पहुंचेंगे 200 करोड़ डोज
यूनिसेफ का दावा है कि वह अगले साल वह 100 गरीब देशों में कोरोना वैक्सीन के 200 करोड़ डोज पहुंचाएगा। इसके लिए यूनिसेफ प्रयासरत है। वर्तमान में वह इस संबंध में 350 एयरलाइंस और फ्रेट कंपनियों से बात कर रहा है ताकि समय रहते लक्ष्य को हासिल किया जा सके और गरीब देशों को समस्याओं से लंबे समय तक न जूझना पड़े।
स्मॉलपॉक्स से लड़ने के लिए बनाई गई थी पहली वैक्सीन
दुनिया में वर्तमान में 28 बीमारियों से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। कोरोना से पहले आखिरी वैक्सीन के रूप में इबोला की वैक्सीन बनाई गई थी। इस वैक्सीन को 2014 में अमेरिका द्वारा बनाया गया था। पहली वैक्सीन 1796 में स्मॉलपॉक्स के लिए बनाई गई थी। यह वैक्सीन ही है जिन के कारण हर साल विश्व में 30 लाख लोगों की जान बचती है।