भारत में कोरोना संक्रमण से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने टीकाकरण अभियान को और तेज कर दिया है। देश में कोविड वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल के मुताबिक सभी लोगों को वैक्सीन की दो खुराक लेना अनिवार्य है। इसके लिए कोवैक्सीन की दोनों डोज में 4 सप्ताह और कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज के बीच 12 से 16 हफ्तों का अंतर रखा गया है। हाल ही में वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव करते हुए भारत सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन के अंतर को 6-8 हफ्तों से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते कर दिया था। इस बारे में विशेषज्ञों का तर्क था कि दो डोज में 12 सप्ताह का अंतर होने से शरीर में एंटीबॉडीज की प्रभाविकता ज्यादा हो सकती है। हालांकि अब इस निर्णय पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
वैक्सीनेशन पर विवाद: तो क्या फिर घट सकता है कोविशील्ड की डोज का अंतराल? जानिए विशेषज्ञ का राय
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तीन वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब एनटीएजीआई के 14 मुख्य सदस्यों की टीम के तीन वैज्ञानिकों ने अंतराल को लेकर सवाल उठा दिए। इन वैज्ञानिकों का कहा है कि दोनों डोज के अंतराल को बढ़ाने से लाभ होता है, इस तरह की सिफारिश करने के लिए पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है। समूह के सदस्य जेपी मुलियिल का कहना है कि एनटीएजीआई में अंतराल बढ़ाने पर चर्चा जरूर हुई, पर हमने 12-16 हफ्ते का जिक्र नहीं किया था। हालांकि इसपर एनटीएजीआई के चीफ डॉ एनके अरोड़ा ने सफाई जरूर दी है।
क्या कहना है एनटीएजीआई चीफ का?
तीन वैज्ञानिकों के बयान पर विवाद बढ़ता देख एनटीएजीआई के चीफ डॉ एनके अरोड़ा ने कहा कि डोज में अंतराल बढ़ाने का फैसला वैज्ञानिक आधार पर और बिना किसी असहमति के लिया गया था। डॉ. अरोड़ा का बताय कि सबसे पहले वैज्ञानिक और प्रयोगशाला के आंकड़ों के आधार पर चार सप्ताह के अंतराल में टीके की प्रभावशीलता 57 देखी गई जो आठ सप्ताह करने पर 60 फीसदी तक हो सकती थी। इसके बाद अप्रैल में ब्रिटेन के आंकड़ों से पता चला कि इसमें 12 सप्ताह का अंतर रखने से वैक्सीन की प्रभाविकता 65 -88% तक हो सकती है। यह फैसला इसी आधार पर लिया गया है।
ब्रिटेन ने घटा दिया है डोज का अंतराल
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रिटेन के जिस आंकड़े की बात डॉ. अरोड़ा कर रहे हैं, वहां भी अंतराल को लेकर हाल ही में बदलाव किया गया है। ब्रिटेन ने मई की शुरुआत में 50 से अधिक आयु के लोगों के लिए कोविशील्ड के अनिवार्य अंतर को 12 सप्ताह से घटाकर आठ सप्ताह कर दिया था। इस संबंध में वैज्ञानिकों का कहना था कि दोनों डोज के बीच अंतराल को आठ सप्ताह का रखना डेल्टा वेरिएंट से सुरक्षा देने में ज्यादा असरदार हो सकता है। अब सवाल यह है कि जब डेल्टा वेरिएंट से सुरक्षा देने के लिए यूके ने अंतराल को कम कर दिया है तो भारत में अभी भी यह 12 हफ्तों का ही क्यों है?
वैक्सीन के अंतराल को लेकर छिड़ी बहस में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन परीक्षण करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने वैक्सीन में 12 हफ्ते के अंतराल रखने का समर्थन किया है। पोलार्ड ने बताया कि ब्रिटेन में ऐसे समय में दो डोज के गैप को कम किया गया, जब उसकी आबादी के बड़े हिस्से का वैक्सीनेशन हो चुका था। ऐसे में भारत और ब्रिटेन के बीच तुलना करना सही नहीं है, दोनों देशों की परिस्थितियां अलग हैं। भारत जल्द से जल्द लोगों को कम से कम एक डोज देने की दिशा में सोच रहा है, ऐसे में इस अंतराल पर बहस करना सही नहीं है। लोगों को 12 हफ्ते के अंतराल पर टीकाकरण कराना चाहिए। इसको घटाने के बारे में फिलहाल नहीं सोचना चाहिए।
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नोट: यह लेख कोविशील्ड वैक्सीन में अंतराल को लेकर तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। भारत में यह अंतराल फिलहाल 12-16 सप्ताह का है, ऐसे में लोगों को इतने अंतराल पर ही दोनों टीके लेने चाहिए।
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